
सूर्य ग्रहण 2026 को लेकर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि ग्रहण के समय पूजा-पाठ क्यों नहीं किया जाता और मंदिरों के कपाट क्यों बंद रहते हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों में सूर्य ग्रहण को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी विशेष समय माना गया है।
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Surya Grahan 2026 Date (सूर्य ग्रहण की तिथि)
- सूर्य ग्रहण 2026 में 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) को लगेगा।
- यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसका धार्मिक महत्व भी बताया गया है।
सूर्य ग्रहण में पूजा-पाठ क्यों नहीं की जाती?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहण काल को अशुद्ध और नकारात्मक ऊर्जा वाला समय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य पर राहु-केतु की छाया पड़ती है, जिससे वातावरण की शुद्धता प्रभावित होती है।
इसी कारण शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के समय की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, इसलिए पूजा-पाठ को वर्जित माना गया है।
ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट क्यों बंद रहते हैं?
सूर्य ग्रहण के दौरान लगभग सभी बड़े और छोटे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में देव प्रतिमाओं की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर हो जाती है।
ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में:
- गंगाजल से शुद्धिकरण
- विशेष अभिषेक
- हवन और आरती
के बाद ही भक्तों के लिए कपाट खोले जाते हैं।
शास्त्रों में बताए गए सूर्य ग्रहण के नियम
शास्त्रों और पुराणों में सूर्य ग्रहण के दौरान इन नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है:
- ग्रहण काल में पूजा-पाठ और मूर्ति स्पर्श न करें
- भोजन बनाना और खाना वर्जित
- पहले से बने भोजन में तुलसी या कुश डालकर रखें
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह
- मंत्र जाप केवल मानसिक रूप से किया जा सकता है
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सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद:
- स्नान करना आवश्यक माना गया है
- घर और पूजा स्थल की सफाई करें
- दान-पुण्य करना शुभ होता है
- इसके बाद ही भगवान की विधिवत पूजा शुरू करनी चाहिए


