
रंगों का पावन पर्व होली हर वर्ष पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन होलिका दहन की शुरुआत जिस स्थान से विशेष मानी जाती है, वह है महाकालेश्वर मंदिर। धार्मिक मान्यता है कि यहां सबसे पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसके बाद देशभर में अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है।
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क्यों खास है महाकालेश्वर में Holika Dahan 2026?
उज्जैन को प्राचीन काल से ही धार्मिक राजधानी माना गया है। यह स्थान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण अत्यंत पवित्र है।
मान्यता है कि यहां होलिका दहन सबसे पहले इसलिए किया जाता है क्योंकि महाकाल स्वयं काल के स्वामी हैं। जब तक महाकाल की अनुमति और अग्नि का आशीर्वाद नहीं मिलता, तब तक अन्य स्थानों पर होलिका दहन शुरू नहीं किया जाता।
पौराणिक कथा का संबंध
होलिका दहन की कथा का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप से जुड़ा है। प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानते थे। प्रह्लाद की भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह अग्नि में बैठकर प्रह्लाद को जला दे।
लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
महाकाल मंदिर की विशेष परंपरा
महाकालेश्वर मंदिर में होलिका दहन से पहले विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहां के पुजारी विधिवत मंत्रोच्चार के साथ अग्नि प्रज्वलित करते हैं। मान्यता है कि इस अग्नि का दर्शन करने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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Holika Dahan 2026 का आध्यात्मिक महत्व
Holika Dahan 2026 केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है।
- घर की नकारात्मकता दूर होती है
- रोग और संकट कम होते हैं
- परिवार में सुख-शांति आती है
- नई शुरुआत के लिए शुभ समय माना जाता है
उज्जैन में होने वाला यह अनुष्ठान पूरे देश के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
