
बृहस्पतिवार व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का विशेष महत्व होता है। बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि, ज्ञान, विवाह योग, संतान सुख और आर्थिक उन्नति प्राप्त होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति ग्रह को “गुरु” कहा जाता है। यह ग्रह शिक्षा, धर्म, भाग्य, धन, विवाह और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उन्हें विशेष रूप से brihaspativar vrat katha पढ़ने और व्रत रखने की सलाह दी जाती है।
brihaspativar vrat katha in hindi का नियमित पाठ करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
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बृहस्पतिवार व्रत कब शुरू करें?
बृहस्पतिवार व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू किया जा सकता है। विशेष रूप से पौष, माघ, वैशाख और श्रावण मास में इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।
परंपरा के अनुसार 16 या 21 लगातार गुरुवार तक यह व्रत किया जाता है। व्रत पूर्ण होने पर उद्यापन किया जाता है।
बृहस्पतिवार व्रत की पूजा विधि
व्रत करने वाले व्यक्ति को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा की सामग्री
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
- देवगुरु बृहस्पति का चित्र
- पीले फूल
- चने की दाल
- गुड़
- हल्दी
- केले
- पीली मिठाई
- दीपक और धूप
- जल का कलश
पूजा विधि
- पूजा स्थल को साफ करके पीले कपड़े पर भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की स्थापना करें।
- दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण करें।
- भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति को पीले पुष्प अर्पित करें।
- “ॐ बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- इसके बाद sampurn brihaspativar vrat katha का पाठ करें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
Sampurn Brihaspativar Vrat Katha (संपूर्ण बृहस्पतिवार व्रत कथा)
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। वह अत्यंत धार्मिक और सत्यनिष्ठ था, लेकिन उसके घर में हमेशा दरिद्रता बनी रहती थी। भोजन तक का अभाव रहता था। उसकी पत्नी इस स्थिति से बहुत दुखी रहती थी।
एक दिन वह ब्राह्मण की पत्नी अपने पति से बोली, “स्वामी, आपने जीवन भर पूजा-पाठ किया है, फिर भी हमारे घर में सुख क्यों नहीं है?”
ब्राह्मण ने कहा, “यह सब हमारे भाग्य और गुरु ग्रह की कमजोरी का परिणाम है।”
उसी रात ब्राह्मण को स्वप्न में देवगुरु बृहस्पति के दर्शन हुए। गुरु देव ने कहा, “यदि तुम सच्चे मन से बृहस्पतिवार व्रत करो और brihaspativar vrat katha in hindi का नियमित पाठ करो, तो तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।”
अगले दिन ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने विधि-विधान से पहला बृहस्पतिवार व्रत रखा। उन्होंने पीले वस्त्र पहने, भगवान विष्णु की पूजा की और व्रत कथा का पाठ किया।
कुछ ही दिनों में उनके जीवन में परिवर्तन दिखने लगा। ब्राह्मण को अच्छे यजमान मिलने लगे। घर में धन आने लगा। धीरे-धीरे उनकी गरीबी समाप्त हो गई।
कुछ समय बाद राजा ने ब्राह्मण की विद्वता से प्रभावित होकर उसे राजपुरोहित बना दिया। उनके घर में सुख-समृद्धि का वास हो गया।
लेकिन ब्राह्मण की पत्नी ने एक बार आलस्यवश व्रत छोड़ दिया। उसी सप्ताह उनके घर में फिर से परेशानियां आने लगीं। तब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने दोबारा पूरे श्रद्धा भाव से व्रत शुरू किया।
गुरु कृपा से उनका जीवन पुनः खुशहाल हो गया।
इस प्रकार यह sampurn brihaspativar vrat katha हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत अवश्य फल देता है।
बृहस्पतिवार व्रत के नियम
- व्रत के दिन पीले रंग का भोजन करें।
- नमक का त्याग करें।
- केले के पेड़ की पूजा करना शुभ माना जाता है।
- झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें।
- जरूरतमंदों को पीली वस्तुएं दान करें।
- गुरुवार को बाल और दाढ़ी न कटवाएं।
बृहस्पतिवार व्रत के लाभ
brihaspativar vrat katha का नियमित पाठ करने से:
- गुरु ग्रह मजबूत होता है
- विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं
- संतान सुख प्राप्त होता है
- व्यापार और नौकरी में उन्नति होती है
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है
- मानसिक शांति मिलती है
- भाग्य का साथ मिलने लगता है
किन लोगों को यह व्रत जरूर करना चाहिए?
- जिनका विवाह देर से हो रहा हो
- जिनकी कुंडली में गुरु कमजोर हो
- जो आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हों
- जिनकी शिक्षा या करियर में रुकावट हो
- जिनके जीवन में बार-बार असफलता आ रही हो
ऐसे लोगों के लिए brihaspativar vrat katha in hindi अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
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निष्कर्ष
बृहस्पतिवार व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। जब श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ sampurn brihaspativar vrat katha का पाठ किया जाता है, तब गुरु कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
यदि आप भी जीवन में सुख-समृद्धि, विवाह, संतान और धन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो विधि-विधान से brihaspativar vrat katha in hindi पढ़ें और बृहस्पतिवार व्रत अवश्य करें।
गुरु बृहस्पति की कृपा से आपका जीवन भी उज्ज्वल हो सकता है।
