श्री करणी चालीसा (Karni Chalisa): सम्पूर्ण पाठ और पूजा विधि

Goddess on tiger, devotees in prayer.
करणी चालीसा(Karni Chalisa): सम्पूर्ण पाठ

जब जीवन में संकट गहराते हैं, मन डगमगाने लगता है—तब “karni chalisa” का पाठ एक अदृश्य शक्ति बनकर सहारा देता है। यह केवल स्तुति नहीं, बल्कि माँ के चरणों में समर्पण का मार्ग है।

श्री करणी चालीसा (सम्पूर्ण पाठ) (Shri Karni Chalisa)

दोहा

जय गणेश जय गज बदन, करण सुमंगल मूल।
करहू कृपा निज दास पर, रहू सदा अनुकूल।।

जय जननी जगदिश्वरी, कह कर बारम्बार।
जगदम्बा करणी सुयश, वरणऊ मति अनुसार।।

चौपाई

सुमिरौ जय जगदम्ब भवानी,
महिमा अकथ न जाय बखानी।।

नमो नमो मेहाई करणी,
नमो नमो अम्बे दुःख हरणी।।

आदि शक्ति जगदम्बे माता,
दुःख को हरणि सुखों कि दाता।।

निरंकार है ज्योति तुम्हारी,
तिंहु लोक फैली उजियारी।।

जो जेहि रूप से ध्यान लगावे,
मन वांछित सोई फल पावे।।

धौलागढ में आप विराजो,
सिंह सवारी सन्मुख साजो।।

भैरों वीर रहे अगवानी,
मारे असुर सकल अभिमानी।।

ग्राम ‘सुआप’ नाम सुखकारी,
चारण वंश करणी अवतारी।।

मुख मण्डल की सुन्दरताई,
जाकी महिमा कही न जाई।।

जब भक्तों ने सुमिरण कीन्हा,
ताही समय अभय करी दीन्हा।।

साहूकार की करी सहाई,
डूबत जल में नाव बचाई।।

जब कान्हे ने कुमति बिचारी,
केहरी रूप धरयो महतारी।।

मारयो ताहि एक छन मांई,
जाकी कथा जगत में छाई।।

नेडी़ जी शुभ धाम तुम्हारो,
दर्शन करी मन होय सुखारो।।

कर सौहे त्रिशूल विशाला,
गल राजे पुष्पन की माला।।

शेखोजी पर किरपा किन्ही,
क्षुधा मिटाय अभय कर दिन्ही।।

निरबल होई जब सुमिरन किन्हा,
कारज सभी सुलभ कर दीन्हा।।

देशनोक पावन थल भारी,
सुंदर मंदिर की छवि न्यारी।।

मढ में ज्योति जले दिन राती,
निखरत ही त्रय ताप नशाती।।

किन्ही यहां तपस्या आकर,
नाम उजागर सब सुख सागर।।

जय करणी दुःख हरणी मईया,
भव सागर से पार करइया।।

बार बार ध्यांऊ जगदम्बा,
कीजे दया करो न विलम्बा।।

धर्मराज नै जब हठ किन्हा,
निज सूत को जीवत करि लीन्हा।।

ताही समय मर्यादा बनाई,
तुम यह मम वंशज नहि आई।।

मूषक बन मंदिर में रहि हैं,
मूषक ते पुनि मानुष बनी हैं।।

दिपोजी को दर्शन दीन्हा,
निज लीला से अवगत किन्हा।।

बने भक्त पर कृपा किन्ही,
दो नैनन की ज्योति दिन्ही।।

चरित अमित किन्ह अपारा,
जाको जश छायो संसारा।।

भक्त जनन को मात तारती,
मगन भक्त जन करत आरती।।

भीड़ पड़ी भक्तो पर जब ही,
भई सहाय भवानी तब ही।।

मातु दया अब हम पर कीजे,
सब अपराध क्षमा कर दीजे।।

मोको मातु कष्ट अति घेरो,
तुम बिन कोन हरे दुःख मेरो।।

जो नर धरे मात कर ध्याना,
ताकर सब विधि हो कल्याणा।।

निशि वासर पुजहिं नर-नारी,
तिनकों सदा करहूं रखवारी।।

भव सागर में नाव हमारी,
पार करहु करणी महतारी।।

कंह लगी वरनंऊ कथा तिहारी,
लिखत लेखनी थकत हमारी।।

पुत्र जानकर कृपा कीजै,
सुख संपति नव निधि कर दीजै।।

जो यह पाठ करे हमेशा,
ताके तन नहि रहे कलेशा।।

संकट में जो सुमिरन करई,
उनके ताप मात सब हरई।।

गुण गाऊं दोऊ कर जोरे,
हरऊ मात सब संकट मोरे।।

दोहा

आदि शक्ति अम्बा सुमिर, धरी करणी का ध्यान।
मन मंदिर में बास करूं, दूर करो अज्ञान।।

करनी चालीसा का महत्व और लाभ

“karni chalisa” केवल स्तुति नहीं—यह भक्ति का अनुभव है।

लाभ:

जो भक्त नित्यप्रति इसका पाठ करते हैं, उनके जीवन में स्थिरता और विश्वास बढ़ता है। यह अनुभव अनेक भक्तों ने साझा किया है।

करनी चालीसा पढ़ने की विधि

भक्ति में विधि का भी महत्व होता है।

सरल विधि:

  • प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठें
  • माँ करनी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें
  • दीपक और धूप जलाएं
  • श्रद्धा से चालीसा का पाठ करें
  • अंत में प्रार्थना करें

विशेष दिन:

करणी माता मंदिर और आस्था

राजस्थान के देशनोक में स्थित मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ चूहों (काबा) को पवित्र माना जाता है।

स्थानीय मान्यता है कि ये चूहे माँ के वंशज हैं। यदि सफेद काबा दिख जाए, तो उसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. करनी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सुबह या शाम, दोनों समय उपयुक्त हैं, लेकिन सुबह का समय श्रेष्ठ माना जाता है।

2. क्या रोज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, दैनिक पाठ सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।

3. क्या घर पर पढ़ना सही है?

हाँ, सच्चे मन से घर पर भी पाठ करने से पूर्ण लाभ मिलता है।

4. क्या इससे संकट दूर होते हैं?

मान्यता है कि माँ करनी अपने भक्तों के संकट हर लेती हैं।

5. करनी माता किसका रूप हैं?

उन्हें माँ दुर्गा का अवतार माना जाता है।

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