22 अप्रैल से खुलेंगे बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, इस साल 10 दिन पहले शुरू होगी यात्रा

केदारनाथ धाम

शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ समाचार सामने आया है। हिमालय की गोद में विराजमान केदारनाथ धाम के कपाट आगामी 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। महीनों तक बर्फ की सफेद चादर में लिपटा यह पावन धाम अब एक बार फिर आस्था, विश्वास और भक्ति की ऊर्जा से गूंजने को तैयार है।

लंबे शीतकालीन विश्राम के बाद बाबा केदारनाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए सज्ज हैं। जैसे ही महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर कपाट खुलने की तिथि की घोषणा हुई, देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे शिव भक्तों में भी उत्साह और श्रद्धा की लहर दौड़ गई। केदारनाथ की यात्रा केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, तपस्या और आस्था से जुड़ा अनुभव है, जो हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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22 अप्रैल को खुलेंगे बाबा केदारनाथ धाम के कपाट

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला में स्थित विश्वविख्यात केदारनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दौरान कपाट वृष लग्न में खुलेंगे, जिसे शास्त्रों में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना गया है।

कपाट खुलने की औपचारिक घोषणा महाशिवरात्रि के दिन पंचकेदार शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में वैदिक मंत्रोच्चार, विधि-विधान और पंचांग गणना के बाद की गई। घोषणा के साथ ही मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।

इस बार 10 दिन पहले शुरू होगी केदारनाथ यात्रा

इस वर्ष बाबा केदारनाथ की यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले आरंभ हो रही है। बीते वर्ष कपाट 10 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल से ही भक्तों को दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा। इसका अर्थ है कि श्रद्धालु इस बार लगभग 10 दिन पहले बाबा के चरणों में शीश नवाने पहुंच सकेंगे।

यात्रा के शीघ्र आरंभ होने से न केवल भक्तों को अधिक समय मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और रोजगार से जुड़े लोगों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

18 अप्रैल से शुरू होंगे पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान

कपाट खुलने से पूर्व कई पारंपरिक और धार्मिक प्रक्रियाएं संपन्न की जाएंगी, जो सदियों से चली आ रही परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं—

  • 18 अप्रैल: भगवान भैरवनाथ की विशेष पूजा
  • 19 अप्रैल: ऊखीमठ से पंचमुखी डोली का प्रस्थान
  • 20 अप्रैल: गौरीकुंड में रात्रि विश्राम
  • 21 अप्रैल: केदारनाथ धाम पहुंचेगी बाबा की डोली
  • 22 अप्रैल, सुबह 8 बजे: विधि-विधान के साथ कपाट खुलेंगे

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भैरवनाथ बाबा को केदारनाथ धाम का क्षेत्रपाल माना जाता है और उनकी पूजा के बिना कपाट नहीं खोले जाते।

केदारनाथ धाम को मिला नया रावल

कपाट खुलने की घोषणा के साथ ही इस वर्ष केदारनाथ धाम के नए मुख्य पुजारी (रावल) की भी घोषणा कर दी गई है। इस बार टी. गंगाधर लिंग को बाबा केदारनाथ का मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया है।

परंपरा के अनुसार केदारनाथ धाम के रावल दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के वीरशैव (लिंगायत) संप्रदाय से होते हैं। यह परंपरा आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित मानी जाती है, जिसका आज भी पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ पालन किया जाता है।

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श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार

बाबा केदारनाथ की इस वर्ष की यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार और प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। यात्रा मार्ग, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और ठहरने की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे शांतिपूर्ण व सुरक्षित दर्शन कर सकें।

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