
Holashtak — क्या है?
Holashtak होली के ठीक 8 दिन पहले से शुरू होने वाली उत्सव-पूर्व अवधि को कहा जाता है, जो फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से पूर्णिमा तक रहती है — यह पूरा काल धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इन दिनों ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल मानी जाती है, जिससे नए शुभ कार्यों, मांगलिक आयोजन और अन्य सकारात्मक शुरुआत पर रोक लगती है। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, संपत्ति क्रय-विक्रय आदि कार्यों को टालना शुभ माना जाता है।
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होलााष्टक का आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से होलाष्टक अशुभ काल ही नहीं है — बल्कि यह आत्मिक उन्नति, आत्म-शुद्धि और ध्यान के लिए उत्तम समय माना जाता है। इस अवधि में ग्रहों की उग्र स्थिति मंत्र जाप, पूजा-अर्चना और ध्यान का प्रभाव कई गुना बढ़ा देती है।
होलााष्टक में क्या करें (Auspicious Activities)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 8 दिनों में निम्न कार्य करने से आपके जीवन में भाग्य, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है:
✔ ईष्ट-देव की पूजा और मंत्र जाप
✔ दान-पुण्य, सेवा कार्य और जरूरतमंदों की सहायता
✔ घर में शुद्धि — गंगाजल छिड़कना, धूप-दीप जलाना
✔ श्रीमद्भागवत, विष्णु सहस्रनाम, या ध्यान-साधना
✔ मन से नकारात्मक भाव हटाकर सकारात्मक सोच अपनाना
इन क्रियाओं को करने से न केवल नकारात्मक प्रभाव कम होता है, बल्कि मन की शांति भी मिलती है, जो होली के उत्सव के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से भी सकारात्मक होता है।
क्या नहीं करना चाहिए (Avoid These During Holashtak)
परंपरा के अनुसार इन आठ दिनों में शुभ-मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए:
✘ विवाह और अन्य मांगलिक संस्कार
✘ नया घर लेना, व्यवसाय शुरू करना
✘ भूमि-जमीन, वाहन या महत्वपूर्ण सम्पत्ति खरीदना
✘ कार्य में अचानक बदलाव या नया निवेश
✘ बड़े सामाजिक समारोह और शुभ समारोह
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सारांश
- Holashtak होली से पहले होने वाला 8-दिन का काल है।
- इस समय नए शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
- धार्मिक गतिविधियाँ, साधना और दान-पुण्य करना शुभ होता है।
यह काल धर्म, ज्योतिर्विद्या और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा हुआ है, जो व्यक्ति को उपस्थित समय का सही इस्तेमाल कर आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रेरित करता है।
