
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन रुद्राभिषेक पूजा सही तरीके से करने से शिवजी की विशेष कृपा मिलती है और जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं।
यदि आप ‘Hast Rekha’ पढ़ना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें — Hast Rekha
रुद्राभिषेक क्या है?
रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का अभिषेक — शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद आदि से स्नान और पूजा करना, मंत्रों के साथ उनका ध्यान करना और श्रद्धा से आराधना करना।
रुद्राभिषेक कैसे करें (सही विधि)
- शुद्धता बनाएँ
पूजा से पहले स्नान कर सफेद या हल्के रंग के स्वच्छ कपड़े पहनें और मन में शांति और भक्ति का संकल्प लें। - पूजा की दिशा
शिवलिंग को साफ स्थान पर रखें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें। - गणेश पूजा
रुद्राभिषेक से पहले गणेश जी की पूजा करके मंगल कामना करें, ताकि पूजा निर्विघ्न सम्पन्न हो। - अभिषेक सामग्री से पूजा
शिवलिंग पर पवित्र जल, गंगाजल, शुद्ध दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। - पंचामृत और फूल
पंचामृत अर्पित करें और शुद्ध बेलपत्र (3-पत्तियाँ), धतूरा और शमीपत्र से पूजा को पूर्ण करें। - दीप-धूप और आरती
अंत में दीपक और धूप जलाएं और शिवजी के समक्ष आरती प्रस्तुत करें।
पूजा में जुड़ी सामान्य गलतियाँ (जिनसे बचें)
यह बातें अकसर अनजाने में की जाती हैं, लेकिन इन्हें पूजा में शामिल न करें — इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है।
तेल या केतकी का फूल
भगवान शिव ने पुराणों में केतकी के फूल का उपयोग पूजा में वर्जित बताया है।
तुलसी के पत्ते
तुलसी भगवान शिव को अर्पित नहीं की जाती — इसलिए शिवलिंग पर तुलसी न चढ़ाएँ।
हल्दी और सिंदूर
हल्दी और सिंदूर को शिवलिंग पर चढ़ाना सही नहीं माना जाता — इनकी जगह चंदन का प्रयोग करें।
शंख से जल चढ़ाना
शंख का जल शिवलिंग पर न चढ़ाएँ — यह पूजा में अशुद्ध माना जाता है।
टूटे हुए चावल (अक्षत)
अक्षत हमेशा पूरा और बिना टूटे होना चाहिए — टूटे चावल का उपयोग न करें।
यदि आप रोज़ाना भक्तिमय वीडियो से जुड़े पाठ सुनना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल पर जाएँ— Bhakti Uday Bharat
निष्कर्ष
- महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक भगवान शिव की कृपा पाने का सर्वोत्तम अवसर है।
- विधि-पूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता, शांति और मंगल कार्यों की प्राप्ति होती है।
