Neel Saraswati Stotram: नील सरस्वती स्तोत्रम्

Neel Saraswati Stotram

Neel Saraswati Stotram माँ नील सरस्वती को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। माँ नील सरस्वती, देवी सरस्वती का ही उग्र और रहस्यमयी स्वरूप मानी जाती हैं। यह स्तोत्र विशेष रूप से बुद्धि, विद्या, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए पाठ किया जाता है।

जो लोग जीवन में बार-बार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, पढ़ाई या करियर में रुकावट महसूस करते हैं, या मन में डर और भ्रम रहता है — उनके लिए neel saraswati की आराधना बहुत लाभकारी मानी जाती है।

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नीलसरस्वती स्तोत्रम् – मंत्र (Neel Saraswati Stotram)

घोर-रूपे महा-रावे
सर्व शत्रु भयङ्करि ।
भक्तेभ्यो वरदे देवि
त्राहि मां शरणागतम् ॥१॥

ॐ सुर-सुरार्चिते देवि
सिद्ध-गन्धर्व-सेविते ।
जाड्य-पाप-हरे देवि
त्राहि मां शरणागतम् ॥२॥

जटा-जूट-समा-युक्ते
लोल-जिह्वान्त-कारिणि ।
द्रुत-बुद्धि-करे देवि
त्राहि मां शरणागतम् ॥३॥

सौम्य-क्रोध-धरे रूपे
चण्ड-रूपे नमोऽस्तु ते ।
सृष्टि-रूपे नमस्तुभ्यं
त्राहि मां शरणागतम् ॥४॥

जडानां जडतां हन्ति
भक्तानां भक्त वत्सला ।
मूढतां हर मे देवि
त्राहि मां शरणागतम् ॥५॥

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि
बलि-होम-प्रिये नमः ।
उग्र तारे नमो नित्यं
त्राहि मां शरणागतम्॥६॥

बुद्धिं देहि यशो देहि
कवित्वं देहि देहि मे ।
मूढत्वं च हरेद्-देवि
त्राहि मां शरणागतम् ॥७॥

इन्द्रादि-विलसद्-द्वन्द्व-
वन्दिते करुणा मयि ।
तारे तारा-धिना-थास्ये
त्राहि मां शरणागतम् ॥८॥

अष्टम्यां च चतुर्दश्यां
नवम्यां यः पठेन्-नरः ।
षण्मासैः सिद्धि-माप्नोति
नात्र कार्या विचारणा ॥९॥

मोक्षार्थी लभते मोक्षं
धनार्थी लभते धनम् ।
विद्यार्थी लभते विद्यां
तर्क-व्याकरणा-दिकम् ॥१०॥

इदं स्तोत्रं पठेद् यस्तु
सततं श्रद्धया-ऽन्वितः ।
तस्य शत्रुः क्षयं याति
महा-प्रज्ञा प्रजायते ॥११॥

पीडायां वापि संग्रामे
जाड्ये दाने तथा भये ।
य इदं पठति स्तोत्रं
शुभं तस्य न संशयः ॥१२॥

इति प्रणम्य स्तुत्वा च
योनि-मुद्रां प्रदर्शयेत् ॥१३॥
॥ इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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निष्कर्ष

Neel Saraswati Stotram in Hindi का पाठ ज्ञान, शक्ति और मानसिक संतुलन पाने का एक सरल उपाय है। नियमित अभ्यास से जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस किए जा सकते हैं। माँ नील सरस्वती सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें।

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