Vikata Sankashti Chaturthi 2026: इस दिन करें ये खास उपाय, गणेश जी दूर करेंगे हर संकट! जानें डेट, मुहूर्त और पूजा विधि

Vikata Sankashti Chaturthi 2026

जब जीवन में मुश्किलें एक के बाद एक आने लगती हैं, तब हर इंसान किसी चमत्कार की उम्मीद करता है। ऐसे समय में भगवान गणेश की कृपा सबसे जल्दी फल देने वाली मानी जाती है।

विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत खास तौर पर सभी संकटों को दूर करने वाला माना जाता है। साल 2026 में यह व्रत बेहद खास योग लेकर आ रहा है, जो आपकी किस्मत बदल सकता है।

अगर आप भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति चाहते हैं, तो इस व्रत की सही जानकारी जरूर जान लें।

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Vikata Sankashti Chaturthi 2026 कब है?

साल 2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी [तारीख: अनुमानित] को मनाई जाएगी (आप स्थानीय पंचांग से सटीक तिथि जरूर जांच लें)।

यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आता है, लेकिन “विकट” नाम वाली चतुर्थी विशेष रूप से कठिन समस्याओं को दूर करने के लिए जानी जाती है।

शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: शाम के समय
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: अगले दिन
  • चंद्रोदय समय: रात (लगभग 8–9 बजे के बीच)

इस व्रत में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है, इसलिए चंद्रोदय का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।

विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व

कहानी के अनुसार, एक बार देवताओं ने भगवान गणेश की पूजा करके अपने सारे संकटों से मुक्ति पाई थी। तभी से यह व्रत “संकट हरने वाला” माना जाने लगा।

“विकट” का अर्थ होता है कठिन या भारी संकट। इस दिन की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है जो जीवन में रुकावटों का सामना कर रहे हैं।

मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर गणपति बप्पा हर मुश्किल को आसान बना देते हैं।

पूजा विधि (Step-by-Step)

सुबह की तैयारी

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें

पूजा प्रक्रिया

  • भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  • दूर्वा, फूल, लड्डू और सिंदूर अर्पित करें
  • “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें

चंद्र दर्शन के बाद

  • रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें
  • गणेश जी की आरती करें
  • इसके बाद ही व्रत खोलें

व्रत कथा (Storytelling Style)

एक समय की बात है, एक गरीब ब्राह्मण हर दिन भगवान गणेश की पूजा करता था, लेकिन उसके जीवन में हमेशा परेशानियाँ बनी रहती थीं।

एक दिन किसी साधु ने उसे विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी। ब्राह्मण ने पूरी श्रद्धा से व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा की।

कुछ ही दिनों में उसकी सारी समस्याएँ खत्म हो गईं और उसका जीवन खुशियों से भर गया।

तभी से यह व्रत संकटों को हरने वाला माना जाता है।

इस व्रत के 5 सबसे जरूरी नियम

  • व्रत के दिन नमक का सेवन न करें
  • चंद्र दर्शन के बिना व्रत न खोलें
  • गणेश जी को दूर्वा जरूर अर्पित करें
  • पूरे दिन मन को शांत रखें और क्रोध न करें
  • गरीबों को दान जरूर करें

विशेष उपाय जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत

  • इस दिन गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं
  • 21 दूर्वा चढ़ाने से विशेष फल मिलता है
  • “गणेश चालीसा” का पाठ करें
  • जरूरतमंद को भोजन कराएं
  • पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं

ये छोटे-छोटे उपाय आपके जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. क्या महिलाएं विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी इस व्रत को रख सकती हैं और उन्हें इसका पूरा फल मिलता है।

Q2. क्या बिना चंद्र दर्शन के व्रत खोल सकते हैं?

नहीं, इस व्रत में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलना जरूरी माना गया है।

Q3. क्या इस दिन फलाहार कर सकते हैं?

हाँ, आप फलाहार कर सकते हैं लेकिन अनाज और नमक से बचना चाहिए।

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Conclusion

विकट संकष्टी चतुर्थी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है। यह दिन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा हर कठिनाई को आसान बना सकती है।

अगर आप भी जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो इस खास दिन भगवान गणेश की पूजा जरूर करें। हो सकता है यही दिन आपकी जिंदगी बदल दे।

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