Som Pradosh Vrat 2026: आज शाम 6:29 से बन रहा है खास संयोग, ऐसे करें शिव पूजा

Som Pradosh Vrat 2026

कहते हैं कि जब सच्चे मन से भगवान शिव का स्मरण किया जाए तो वे भक्तों की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। प्रदोष व्रत भी उन्हीं खास अवसरों में से एक है, जब शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव से महादेव की आराधना करते हैं।

आज का सोम प्रदोष व्रत इसलिए और भी खास माना जा रहा है क्योंकि शाम 6:29 बजे से पूजा का शुभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।

आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा का सही समय और इसे करने की पूरी विधि।

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सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव अपने भक्तों की विशेष रूप से सुनते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम से इस व्रत को करता है, उसके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव की कृपा से सफलता के रास्ते खुलते हैं।

आज शाम 6:29 बजे से बनेगा शुभ पूजा संयोग

धार्मिक पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल की शुरुआत शाम 6:29 बजे से मानी जा रही है।

यही वह समय है जब भगवान शिव की पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है।

इस दौरान शिव मंदिर में दीप जलाकर, बेलपत्र अर्पित करके और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

यदि आप पहली बार सोम प्रदोष व्रत कर रहे हैं, तो इसकी पूजा विधि बहुत सरल है।

सुबह ऐसे करें शुरुआत

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।

शाम के समय करें विशेष पूजा

प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।

पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है।

शिव मंत्र का करें जाप

पूजा करते समय “ॐ नमः शिवाय” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है

सोम प्रदोष व्रत में इन 5 बातों का रखें खास ध्यान

  • शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं, इसे भगवान शिव का प्रिय माना जाता है।
  • पूजा के समय दीपक जलाना शुभ होता है।
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
  • प्रदोष काल में शिव चालीसा या शिव स्तोत्र का पाठ करें।
  • मंदिर जाकर भगवान शिव और नंदी को प्रणाम करना बहुत शुभ माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत की कथा का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एक समय एक गरीब ब्राह्मण परिवार बहुत कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहा था।

एक दिन उन्हें एक साधु ने सोम प्रदोष व्रत रखने की सलाह दी।

ब्राह्मण ने पूरे श्रद्धा भाव से यह व्रत करना शुरू किया। धीरे-धीरे भगवान शिव की कृपा से उसकी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी और जीवन में सुख-समृद्धि आने लगी।

तभी से माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रदोष व्रत करता है, उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

सोम प्रदोष व्रत के फायदे

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से कई लाभ मिलते हैं।

मनोकामनाएं होती हैं पूरी

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यह व्रत सबसे प्रभावशाली माना जाता है।

विवाह में आने वाली बाधाएं होती हैं दूर

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है।

आर्थिक परेशानियों से मिलता है राहत

नियमित रूप से प्रदोष व्रत करने से धन संबंधी समस्याएं कम होती हैं।

घर में आती है सुख-समृद्धि

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

प्रदोष काल में शिव आराधना क्यों मानी जाती है खास

धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में देवताओं ने भगवान शिव की आराधना करके उन्हें प्रसन्न किया था।

इसी कारण इस समय को शिव पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

इस दौरान की गई पूजा, ध्यान और मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक मिलता है।

FAQ

1. सोम प्रदोष व्रत किस भगवान को समर्पित होता है?

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।

2. सोम प्रदोष व्रत की पूजा का सही समय क्या है?

प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय, जो आज लगभग शाम 6:29 बजे से माना जा रहा है।

3. सोम प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?

व्रत के दौरान फल, दूध और सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है।

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Conclusion

सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक बहुत ही पवित्र अवसर माना जाता है। आज शाम 6:29 बजे से शुरू होने वाला प्रदोष काल शिव आराधना के लिए खास संयोग बना रहा है।

यदि आप श्रद्धा और नियम से इस व्रत को करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुल सकता है।

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