Sheetla Ashtami 2026: आज शीतला अष्टमी पर क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? जानें इसके पीछे की रहस्यमयी परंपरा

Sheetla Ashtami 2026

भारत में कई ऐसे पर्व हैं जिनमें आस्था के साथ-साथ गहरी परंपराएं भी जुड़ी होती हैं। उन्हीं में से एक है शीतला अष्टमी

हर साल इस दिन एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है — घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और लोग ठंडा भोजन करते हैं।

बहुत से लोग इस परंपरा को निभाते तो हैं, लेकिन इसके पीछे की कहानी और मान्यता से अनजान रहते हैं। आखिर क्यों शीतला माता के दिन आग नहीं जलाई जाती? इसके पीछे की धार्मिक कथा और वैज्ञानिक कारण बेहद रोचक हैं।

यदि आप ‘Chaitra Navratri Muhurat 2026’ पढ़ना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें —  Chaitra Navratri Muhurat 2026

शीतला अष्टमी क्या है?

शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो चैत्र महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता रोगों से रक्षा करती हैं और विशेष रूप से चेचक और संक्रामक बीमारियों से बचाव करती हैं

इस दिन भक्त माता को ठंडा भोजन, बासी भोजन और मीठे पकवान का भोग लगाते हैं।

क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा?

धार्मिक मान्यता

शीतला माता को शीतलता की देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता को गर्मी और आग बिल्कुल पसंद नहीं है।

इसी कारण इस दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता।

एक दिन पहले यानी सप्तमी को ही भोजन बना लिया जाता है, जिसे अष्टमी के दिन ठंडा करके माता को भोग लगाया जाता है और परिवार के लोग भी वही भोजन ग्रहण करते हैं।

शीतला माता की पौराणिक कथा

धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार शीतला माता पृथ्वी पर आईं और लोगों से कहा कि मेरे दिन आग मत जलाना और ठंडा भोजन करना

लेकिन कुछ लोगों ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया और घर में चूल्हा जला दिया।

कहते हैं कि इससे माता क्रोधित हो गईं और उनके घरों में बीमारी फैल गई।

जब लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने माता से क्षमा मांगी और उनकी पूजा की। तब जाकर माता शांत हुईं और लोगों को रोगों से मुक्ति मिली।

तभी से शीतला अष्टमी पर चूल्हा न जलाने की परंपरा शुरू हो गई।

शीतला अष्टमी पर क्या खाया जाता है?

इस दिन विशेष रूप से बासी या ठंडा भोजन किया जाता है, जिसे कई जगह बसौड़ा भी कहा जाता है।

अष्टमी से एक दिन पहले घरों में अलग-अलग पकवान बनाए जाते हैं जैसे—

  • पूड़ी
  • कचौरी
  • मीठे पकवान
  • हलवा
  • दही और चने

इन सभी चीजों को अगले दिन माता को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

शीतला अष्टमी से जुड़ी 5 महत्वपूर्ण बातें

  • इस दिन शीतला माता की पूजा से रोगों से रक्षा होने की मान्यता है।
  • अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
  • एक दिन पहले बनाए गए ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है।
  • शीतला माता की सवारी गधा मानी जाती है।
  • कई जगह इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारा भी होता है।

शीतला अष्टमी की पूजा विधि

सुबह ऐसे करें पूजा

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

इसके बाद शीतला माता के मंदिर जाएं या घर में उनकी तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

पूजा में चढ़ाएं ये चीजें

  • ठंडा भोजन
  • हल्दी
  • कुमकुम
  • फूल
  • जल

इसके बाद माता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

क्या है इस परंपरा के पीछे वैज्ञानिक कारण?

धार्मिक मान्यताओं के अलावा इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी माना जाता है

पुराने समय में गर्मियों की शुरुआत में संक्रमण और चेचक जैसी बीमारियां तेजी से फैलती थीं

एक दिन पहले बना हुआ भोजन खाने से लोगों को आराम मिलता था और खाना बनाने की भागदौड़ कम होती थी।

साथ ही रसोई में आग न जलाने से गर्मी भी कम होती थी।

इस तरह यह परंपरा धार्मिक होने के साथ-साथ स्वास्थ्य से भी जुड़ी हुई थी

यदि आप रोज़ाना भक्तिमय वीडियो से जुड़े पाठ सुनना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल पर जाएँ— Bhakti Uday Bharat

FAQ

1. शीतला अष्टमी 2026 कब है?

शीतला अष्टमी 2026 में मार्च महीने में चैत्र कृष्ण अष्टमी के दिन मनाई जाएगी और इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है।

2. शीतला अष्टमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शीतला माता को ठंडा भोजन प्रिय है और आग से उन्हें क्रोध आता है, इसलिए इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता।

3. शीतला अष्टमी पर क्या खाना चाहिए?

इस दिन एक दिन पहले बनाया हुआ ठंडा भोजन जैसे पूड़ी, कचौरी, हलवा, दही और चने खाए जाते हैं और इन्हें माता को भोग लगाया जाता है।

Conclusion

शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यताओं का सुंदर संगम है।

इस दिन चूल्हा न जलाने की परंपरा हमें यह सिखाती है कि हमारी संस्कृति में हर परंपरा के पीछे कोई न कोई गहरा कारण जरूर होता है।

यदि श्रद्धा और नियम के साथ शीतला माता की पूजा की जाए, तो मान्यता है कि माता अपने भक्तों को रोगों से बचाती हैं और घर में सुख-शांति बनाए रखती हैं।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top