
हर वर्ष फाल्गुन मास में आने वाली नरसिंह द्वादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु के उग्र अवतार नरसिंह को समर्पित होती है। वर्ष 2026 में नरसिंह द्वादशी होली से पहले पड़ रही है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल हैं—आखिर इसका होली से क्या संबंध है और भक्त प्रह्लाद की कथा इसमें कैसे जुड़ी है?
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नरसिंह द्वादशी क्यों है खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार धारण कर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध किया था। यह दिन अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
होली से पहले क्यों आती है नरसिंह द्वादशी?
फाल्गुन मास में पहले नरसिंह द्वादशी और उसके बाद होलिका दहन व होली का पर्व आता है। माना जाता है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका का अंत भी इसी कालखंड में हुआ था। इस कारण नरसिंह द्वादशी और होली का आपसी संबंध धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भक्त प्रह्लाद से क्या है संबंध?
प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यप भगवान के विरोधी थे। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दीं, लेकिन हर बार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की। अंततः नरसिंह अवतार में भगवान ने हिरण्यकश्यप का अंत कर प्रह्लाद की भक्ति को अमर कर दिया।
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नरसिंह द्वादशी पर क्या करें?
- इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है
- भगवान नरसिंह की पूजा और मंत्र जाप करें
- भक्त प्रह्लाद की कथा का पाठ करें
- दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करें
ऐसा माना जाता है कि नरसिंह द्वादशी पर विधि-विधान से पूजा करने से भय, बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।


