
राजस्थान के सीकर जिले के खाटूधाम में हर वर्ष की तरह इस साल भी खाटू श्याम का वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेला 2026 धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह मेला 21 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलता है, लेकिन इसका सबसे प्रमुख दिन 27 फरवरी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) है क्योंकि इसी दिन बाबा श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस खास अवसर पर देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु खाटूधाम पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में भक्ति-भाव से दर्शन करते हैं।
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बाबा खाटू श्याम कौन हैं?
बाबा खाटू श्याम को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का कलियुग अवतार माना जाता है। कथा के अनुसार, वे महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक — भीम के पौत्र, घटोत्कच के पुत्र — थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलियुग में वे “श्याम” के नाम से पूजे जाएंगे और सच्चे मन से पुकारे जाने पर भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करेंगे।
27 फरवरी क्यों खास है?
- फाल्गुन शुक्ल एकादशी को बाबा श्याम का जन्मदिन माना जाता है।
- इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन होता है।
- भक्त केसरिया ध्वज, चूरमा और पुष्पों की चादर अर्पित करते हैं।
- खाटू नगरी दुल्हन की तरह सजा दी जाती है और रात भर भजन-संध्या का कार्यक्रम चलता है।
बाबा खाटू श्याम से जुड़ी 10 प्रमुख बातें
- बर्बरीक का शीश पूजित है – खाटू में बाबा के शीश की पूजा परंपरा है।
- हारे का सहारा – बाबा श्याम को संकट में फंसे भक्तों का सहारा माना जाता है।
- भीम के पौत्र – बर्बरीक महाभारत के पांडव योद्धाओं के परिवार से थे।
- तीन बाणधारी – भगवान ने उन्हें तीन दिव्य बाण दिए थे।
- भगवान का आशीर्वाद – श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में पूज्य होने का वरदान दिया।
- लक्खी मेले की परंपरा – फाल्गुन लक्खी मेला धार्मिक आयोजन का प्रमुख उत्सव है।
- विशेष प्रसाद – चूरमा, केसरिया ध्वज और इत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- निशान यात्रा – भक्त निशान लेकर पैदल यात्रा करते हैं।
- मनोकामना पूर्ति – सच्चे मन से प्रार्थना करने पर इच्छा पूरी होने की मान्यता।
- विश्व प्रसिद्ध स्थल – खाटूधाम में हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं।
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खाटूधाम कहाँ है?
खाटूधाम राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, जो जयपुर से लगभग 80 किमी दूर है। सड़क और रेल से दर्शन के लिए अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं, और मेले के दौरान प्रशासन विशेष व्यवस्थाएँ करता है।
