
होलिका दहन के बाद बची हुई राख को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यह राख नकारात्मक शक्तियों को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती है। विशेष रूप से होलिका दहन 2026 के बाद इस राख का सही विधि से उपयोग करने पर इसके शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं।
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होलिका की राख लगाने का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस अग्नि से उत्पन्न राख में शुद्धिकरण की शक्ति मानी जाती है। इसे लगाने से व्यक्ति पर आने वाले दोष, भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
होलिका की राख लगाने का सही स्थान
- माथे पर तिलक के रूप में – मानसिक शांति और बुरी नजर से रक्षा
- नाभि पर – स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में लाभ
- घर के मुख्य द्वार पर – नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश रुकता है
- तिजोरी या पूजा स्थान पर – धन और समृद्धि में वृद्धि
होलिका की राख लगाने की सही विधि
- होलिका दहन के अगले दिन प्रातः स्नान करें
- साफ मन से थोड़ी-सी राख लें
- “ॐ नमः शिवाय” या अपने इष्ट देव का मंत्र जपते हुए लगाएं
- राख को हमेशा सम्मानपूर्वक रखें, पैरों के नीचे न आने दें
होलिका की राख से मिलने वाले लाभ
- नकारात्मक ऊर्जा और ग्रह दोष में कमी
- रोग, भय और बाधाओं से मुक्ति
- आर्थिक परेशानियों में राहत
- घर-परिवार में सुख-शांति का वास
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किन बातों का रखें विशेष ध्यान
- राख का मजाक न बनाएं
- गलत स्थान या अपवित्र अवस्था में न लगाएं
- इसे कूड़े में न फेंकें
