Holashtak 2026: होलाष्टक क्या होता है, इसे अशुभ समय क्यों माना जाता है? जानें धार्मिक मान्यताएं

Holashtak 2026

होलाष्टक हिंदू धर्म में होली से पहले आने वाले आठ खास दिन होते हैं। ये दिन फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक रहते हैं। परंपरा के अनुसार, इन दिनों में किसी भी शुभ या मांगलिक काम को करने से बचा जाता है।

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होलाष्टक का नाम कैसे पड़ा?

‘होल’ यानी होलिका और ‘अष्टक’ यानी आठ। होलिका दहन से पहले के ये आठ दिन मिलकर होलाष्टक कहलाते हैं।

होलाष्टक को अशुभ क्यों माना जाता है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन से पहले भक्त प्रह्लाद को लगातार आठ दिनों तक अलग-अलग तरह की यातनाएं दी गई थीं। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से उनका कुछ भी नुकसान नहीं हुआ। उन्हीं कष्टों की याद में ये आठ दिन संवेदनशील माने जाते हैं।

ज्योतिष के अनुसार भी इन आठ दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए नए काम शुरू करना शुभ नहीं माना जाता।

होलाष्टक में किन कामों से बचना चाहिए?

  • शादी या सगाई
  • गृह प्रवेश
  • मुंडन संस्कार
  • नया व्यापार शुरू करना
  • वाहन या संपत्ति खरीदना

होलाष्टक में क्या करना शुभ माना जाता है?

  • भगवान विष्णु की पूजा
  • मंत्र जप और ध्यान
  • दान-पुण्य करना
  • संयम और सात्विक जीवन अपनाना

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होलाष्टक का असली संदेश

होलाष्टक डर का नहीं, आत्मसंयम और भक्ति का समय है। इन दिनों मन को शांत रखकर पूजा-पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

होलाष्टक खत्म होते ही होलिका दहन और रंगों की होली मनाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

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