
हिंदू धर्म में होली से पहले आने वाले आठ दिन होलाष्टक के रूप में जाने जाते हैं। वर्ष 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से होगी। इन आठ दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
यदि आप ‘Phulera Dooj 2026’ पढ़ना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें — Phulera Dooj 2026
होलाष्टक का धार्मिक महत्व
होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा से जुड़ा है। मान्यता है कि इन आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेक प्रकार की यातनाएं दी गई थीं, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से वे सुरक्षित रहे। इसी कारण यह समय तप, संयम और भक्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है।
होलाष्टक में क्यों नहीं होते शुभ कार्य
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति अशुभ मानी जाती है। विशेष रूप से मंगल, शनि और राहु का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे मांगलिक कार्यों में बाधा आने की संभावना रहती है।
होलाष्टक में क्या करें
- भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद की पूजा करें
- व्रत, जप और ध्यान करें
- जरूरतमंदों को दान दें
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें
यदि आप रोज़ाना भक्तिमय वीडियो से जुड़े पाठ सुनना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल पर जाएँ— Bhakti Uday Bharat
होलाष्टक में क्या न करें
- विवाह या सगाई जैसे शुभ कार्य
- नया व्यापार या वाहन खरीदना
- गृह प्रवेश या भूमि पूजन
होलाष्टक के समाप्त होते ही होली का पर्व आता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
