
हनुमान चालीसा भगवान श्रीहनुमान की कृपा पाने का एक अत्यंत प्रभावशाली पाठ माना जाता है। लेकिन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार, इसका पाठ करते समय कुछ नियमों और मर्यादाओं का ध्यान रखना जरूरी होता है। सही विधि से किया गया पाठ जीवन में शक्ति, साहस और नकारात्मकता से मुक्ति देता है।
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हनुमान चालीसा का पाठ किन परिस्थितियों में न करें
- अशुद्ध अवस्था में (जैसे स्नान किए बिना) हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए।
- नशे की हालत, क्रोध या अत्यधिक मानसिक अशांति में पाठ से बचना चाहिए।
- शौचालय या अपवित्र स्थान पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करना अनुचित माना गया है।
- किसी का मजाक उड़ाते हुए या बिना श्रद्धा के पाठ नहीं करना चाहिए।
- देर रात सोने से ठीक पहले, जब मन पूरी तरह थका हुआ हो, उस समय पाठ न करें।
मान्यता है कि हनुमान जी भक्ति और अनुशासन से प्रसन्न होते हैं, न कि केवल शब्दों के उच्चारण से।
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
- रोज़ाना 1 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- मनोकामना पूर्ति के लिए 7, 11 या 21 बार पाठ किया जा सकता है।
- किसी विशेष संकट या भय से मुक्ति के लिए 40 दिनों तक रोज़ एक ही समय पर पाठ करने की परंपरा है।
- मंगलवार या शनिवार को 3, 5 या 7 बार पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए शुभ दिन
- मंगलवार – हनुमान जी का प्रिय दिन, शक्ति और साहस के लिए
- शनिवार – शनि दोष और बाधाओं से मुक्ति के लिए
- इसके अलावा प्रतिदिन पाठ करने से भी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है
हनुमान चालीसा पढ़ने का सही समय
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद
- शाम को सूर्यास्त के समय
- मंगलवार/शनिवार को रात 8 से 10 बजे के बीच भी पाठ किया जा सकता है
पाठ के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
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हनुमान चालीसा पाठ से मिलने वाले लाभ
- भय, नकारात्मक ऊर्जा और बुरे सपनों से राहत
- मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि
- शत्रु बाधा और ग्रह दोषों में कमी
- जीवन में साहस, बल और सफलता

