
हनुमान अष्टक पाठ का महत्व
Hanuman Ashtak Path in Hindi हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायक और शक्तिशाली पाठ माना जाता है। यह पाठ भगवान हनुमान की महिमा, बल, बुद्धि और भक्ति का वर्णन करता है। नियमित रूप से hanuman ashtak path करने से जीवन के सभी संकट, भय, रोग, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
हनुमान जी को कलियुग का जागृत देवता माना गया है। जो भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सफलता स्वतः आती है।
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हनुमान अष्टक क्या है?
हनुमान अष्टक आठ श्लोकों का एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें भगवान हनुमान के अद्भुत पराक्रम और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का वर्णन किया गया है। Hanuman Ashtak Path विशेष रूप से संकट, भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और मानसिक पीड़ा से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।
हनुमान अष्टक पाठ करने का सही समय
Hanuman Ashtak Path in Hindi निम्न समय पर करना विशेष फलदायी होता है:
- मंगलवार और शनिवार
- ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4–6 बजे)
- सूर्यास्त के बाद
- संकट या भय के समय
मंगलवार के दिन हनुमान अष्टक का पाठ करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
हनुमान अष्टक पाठ विधि
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं
- लाल फूल और सिंदूर अर्पित करें
- शांत मन से hanuman ashtak path in hindi का पाठ करें
- अंत में हनुमान चालीसा या “बजरंग बाण” का पाठ कर सकते हैं
हनुमान अष्टक पाठ (Hanuman Ashtak Path in Hindi – पूर्ण पाठ)
बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिए कौन बिचारो॥
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो॥
हेरी थके तट सिंधु सबै तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कही शोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मारो॥
चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका शोक निवारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
बाण लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो॥
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्राण उबारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो॥
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहि जात है टारो॥
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो।
को नहि जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो॥
हनुमान अष्टक पाठ के लाभ
Hanuman Ashtak Path करने से मिलने वाले प्रमुख लाभ:
- भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
- शत्रु बाधा और कोर्ट केस में राहत
- मानसिक तनाव और अवसाद से मुक्ति
- ग्रह दोष (विशेषकर मंगल दोष) में शांति
- आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
- नौकरी, व्यापार और पढ़ाई में सफलता
हनुमान अष्टक पाठ कितनी बार करना चाहिए?
- सामान्य स्थिति में: सप्ताह में 1–2 बार
- विशेष संकट में: 7, 11 या 21 दिन तक प्रतिदिन
- मंगल दोष या शनि पीड़ा में: 108 बार पाठ का संकल्प
हनुमान अष्टक और हनुमान चालीसा में अंतर
| हनुमान अष्टक | हनुमान चालीसा |
|---|---|
| 8 श्लोक | 40 चौपाइयाँ |
| संकट निवारण पर केंद्रित | संपूर्ण जीवन कल्याण |
| शीघ्र फलदायी | दीर्घकालिक प्रभाव |
दोनों का साथ में पाठ करना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।
हनुमान अष्टक पाठ से जुड़े नियम
- पाठ करते समय मन एकाग्र रखें
- नकारात्मक विचार न लाएं
- पाठ के बाद प्रसाद वितरण करें
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से बचें
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निष्कर्ष
Hanuman Ashtak Path in Hindi केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि जीवन के हर संकट से बाहर निकलने का आध्यात्मिक उपाय है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ hanuman ashtak path करता है, उस पर बजरंगबली की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है।
“संकट मोचन हनुमान” का स्मरण करने मात्र से भय और दुख दूर हो जाते हैं।


