
गुरुवार के 16 व्रत: किसे रखना चाहिए, नियम और विधि
हिंदू धर्म में गुरुवार का व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। ऐसे मान्यता है कि गुरुवार के व्रत और पूजा-पाठ से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और घर में सुख, समृद्धि तथा आशीर्वाद मिलता है।
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16 गुरुवार व्रत किन लोगों को रखना चाहिए?
गुरुवार का व्रत पुरुष और महिला दोनों रख सकते हैं। विवाह की इच्छा रखने वाले अविवाहित लोग, संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाली महिलाएँ भी इसका पालन कर सकती हैं। खासकर उन लोगों को 16 गुरुवार का व्रत करना शुभ माना जाता है जिनके विवाह में देरी हो रही हो, कुंडली में गुरु (बृहस्पति) दोष हो या घर में आर्थिक तंगी बनी हुई हो।
16 गुरुवार व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 16 गुरुवार तक व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसके पूरा होने पर 17वें गुरुवार को उद्यापन करना चाहिए। इसके अलावा आप गुरुवार का व्रत 1, 3, 5, 7 या 9 साल तक भी रख सकते हैं। व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष की तिथि से करें और पौष माह में व्रत शुरु न करें।
गुरुवार व्रत कैसे करें (विधि)
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु तथा बृहस्पति देव की पूजा-अर्चना करते हुए संकल्प लें। पूजा में पीले वस्त्र, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। केले के पेड़ की पूजा और पत्तों का प्रयोग भी शुभ माना जाता है। पूजा के समय दीपक जलाएं और व्रत कथा पढ़ें।
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गुरुवार व्रत के नियम
- नमक का सेवन न करें
- केले न खाएं
- काले और नीले कपड़े पहनें नहीं
- साधु-संतों तथा पशु-पक्षियों का अपमान न करें
- सिलाई-काटने का काम न करें
- पूजा का सामान क्रय न करें
- महिलाएँ व्रत के दिन बाल न धोएँ
- नाखून न काटें
