
साल 2026 में होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बनने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब किसी पर्व के आसपास ग्रहण पड़ता है तो उसका प्रभाव पूजा-पाठ और शुभ कार्यों पर भी देखा जाता है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि होलिका दहन और होली के उत्सव पर चंद्र ग्रहण का क्या असर पड़ेगा और सूतक काल कब से मान्य होगा।
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कब लगेगा चंद्र ग्रहण 2026?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार मार्च 2026 में चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण फाल्गुन मास के दौरान लगने वाला है, जिससे होलिका दहन के समय को लेकर विशेष चर्चा हो रही है। ग्रहण का समय, इसकी अवधि और भारत में इसकी दृश्यता के आधार पर धार्मिक नियम लागू होते हैं।
क्या होलिका दहन पर पड़ेगा प्रभाव?
यदि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तो सूतक काल मान्य होगा और ग्रहण से पहले कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। हालांकि, यदि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो सूतक काल मान्य नहीं होता और त्योहार सामान्य रूप से मनाया जा सकता है।
सूतक काल कब से शुरू होगा?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है। इस दौरान:
- मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं
- भोजन पकाना और ग्रहण करना वर्जित माना जाता है
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है
- भगवान का ध्यान, मंत्र जाप और पाठ करना शुभ माना जाता है
ग्रहण के दौरान क्या करें?
- भगवान का नाम स्मरण करें
- महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करें
- जरूरतमंदों को दान दें
- ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर घर और मंदिर की शुद्धि करें
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क्या न करें?
- ग्रहण काल में शुभ कार्य शुरू न करें
- भोजन बनाने और खाने से बचें
- नकारात्मक विचारों और वाद-विवाद से दूर रहें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का समय माना जाता है। इसलिए इस अवधि में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।


