
चैती छठ का तीसरा दिन… यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और समर्पण की सबसे बड़ी परीक्षा है।
जब डूबते सूरज को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर दीप जलते हैं, तो हर दिल में एक ही प्रार्थना होती है — सुख, शांति और समृद्धि।
आज का दिन बेहद खास है, क्योंकि यही वह समय है जब व्रती संध्या अर्घ्य देकर भगवान सूर्य और छठी मैया से अपने परिवार की खुशहाली मांगते हैं।
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आज है चैती छठ का तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य का महत्व
चैती छठ पूजा का तीसरा दिन “संध्या अर्घ्य” का होता है।
इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इस समय सूर्य देव अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं और व्रती की हर मनोकामना पूरी होती है।
इस दिन की पूजा में एक अलग ही शांति और ऊर्जा महसूस होती है, जो पूरे साल सकारात्मकता देती है।
संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त
अर्घ्य देने का सही समय
- सूर्यास्त का समय: शाम 6:25 से 6:40 बजे (लगभग)
- अर्घ्य देने का सर्वोत्तम समय: सूर्यास्त के दौरान
ध्यान रखें कि अर्घ्य हमेशा डूबते सूर्य को ही दिया जाता है।
मुहूर्त का सही पालन करना बेहद जरूरी होता है।
पूजा की तैयारी कैसे करें?
1. घाट या घर की सफाई
सुबह से ही घर और पूजा स्थल को साफ करें।
जहां अर्घ्य देना है, वहां स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
2. पूजा की टोकरी (दौरा) सजाएं
टोकरी में रखें:
- ठेकुआ
- फल (केला, नारियल, सेब)
- गन्ना
- दीपक और धूप
3. जल में खड़े होकर अर्घ्य दें
व्रती महिलाएं और पुरुष पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं।
यह क्षण बहुत ही भावुक और पवित्र होता है।
4. छठ गीत और भजन
पूजा के दौरान पारंपरिक छठ गीत गाए जाते हैं, जो माहौल को भक्तिमय बना देते हैं।
5. दीपदान करें
अर्घ्य के बाद दीप जलाकर नदी या तालाब में प्रवाहित करें।
क्यों खास है संध्या अर्घ्य?
कहते हैं कि जब सूर्य अस्त होता है, तब वह अपनी ऊर्जा को शांत रूप में धरती पर फैलाता है।
इसी समय अर्घ्य देने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पुरानी कथा के अनुसार, द्रौपदी ने भी छठ व्रत रखकर अपने परिवार को संकट से बचाया था।
तब से यह व्रत सुख-समृद्धि और संकट मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
संध्या अर्घ्य के दिन ये गलतियां बिल्कुल न करें
- पूजा में प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें
- बिना स्नान के पूजा न करें
- सूर्यास्त से पहले अर्घ्य न दें
- व्रत के नियमों को हल्के में न लें
- साफ-सफाई में लापरवाही न करें
छोटी-छोटी गलतियां पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं।
आज के दिन जरूर ध्यान रखें ये 5 जरूरी बातें
- अर्घ्य हमेशा शुद्ध मन और श्रद्धा से दें
- व्रती को नमक और अनाज से परहेज करना चाहिए
- पूजा सामग्री पूरी और शुद्ध होनी चाहिए
- परिवार के सभी सदस्य शामिल हों
- सूर्य देव और छठी मैया का आभार जरूर व्यक्त करें
आस्था का अद्भुत संगम – भावनाओं से जुड़ा पर्व
छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह परिवार, संस्कृति और विश्वास का अद्भुत संगम है।
जब पूरा परिवार एक साथ घाट पर खड़ा होकर सूर्य देव को अर्घ्य देता है, तो वह पल जीवन भर याद रहता है।
FAQs
1. संध्या अर्घ्य किस समय देना चाहिए?
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त के समय, लगभग शाम 6:25 से 6:40 बजे के बीच देना सबसे शुभ होता है।
2. क्या घर पर अर्घ्य दे सकते हैं?
हाँ, अगर नदी या तालाब उपलब्ध नहीं है, तो घर पर स्वच्छ जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया जा सकता है।
3. छठ पूजा में ठेकुआ का क्या महत्व है?
ठेकुआ छठ पूजा का मुख्य प्रसाद है, जिसे शुद्धता और श्रद्धा से बनाया जाता है।
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Conclusion
चैती छठ का तीसरा दिन हर व्रती के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
संध्या अर्घ्य का यह पावन समय जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाने का अवसर देता है।
अगर आप सच्चे मन से यह पूजा करते हैं, तो छठी मैया और सूर्य देव जरूर आपकी हर इच्छा पूरी करते हैं।
