
आमलकी एकादशी 2026 एक पवित्र हिंदू व्रत और उत्सव है, जिसे भगवान विष्णु (श्रीहरि) को समर्पित किया जाता है। यह Ekadashi फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि को आती है और वर्ष 2026 में यह 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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तिथि और शुभ मुहूर्त
- आमलकी एकादशी तिथि: 27 फरवरी 2026
- Ekadashi तिथि आरंभ: मध्यरात्रि के बाद ⏱️
- पारण (व्रत तोड़ने का समय): 28 फरवरी को सुबह sunrise के बाद (स्थानीय पंचांग के अनुसार)
यह Ekadashi कभी-कभी रंगभरी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है, क्योंकि यह Holi त्योहार के करीब आती है और जीवन में रंग, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
महत्व और आस्था
आमलकी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और आंवले (आमलका वृक्ष) का पूजन विशेष पुण्यदायी माना जाता है। हिंदू धर्म में ऐसा विश्वास है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने और व्रत रखने से पापों का नाश, मोक्ष की प्राप्ति, और जीवन में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
पूजा विधि (Puja Vidhi)
- प्रातः स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीप, धूप, पुष्प और तुलसी अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम या मंत्रों का जाप करें।
- यदि संभव हो तो आमलकी वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और पूजा करें।
- शाम को आरती कर प्रसाद वितरित करें।
ध्यान रखें कि Ekadashi के दिन चावल, मांस, या भारी खाने से परहेज करना चाहिए और सात्विक भोजन ही ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
भोग (Offerings) — श्रीहरि के लिए
आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु को विशेष रूप से ये भोग चढ़ाना शुभ होता है:
- आंवला (Indian gooseberry) — ताजा या मुरब्बा रूप में
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण
- पीली मिठाई — जैसे बेसन के लड्डू या केसर हलवा
- फल — केले, सेब, मौसमी फल
- सूखे मेवे — बादाम, काजू, किशमिश
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व्रत के नियम और फल
इस दिन व्रत पूर्ण श्रद्धा से रखें, व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य, संयम और सकारात्मक विचारों पर ध्यान दें। लोक विश्वास के अनुसार:
- यह व्रत पापों का नाश करता है।
- जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।
- भक्तों को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
