
मोहिनी एकादशी 2026 वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार की स्मृति में रखा जाता है और यह व्रत पापों का नाश करके मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
मोहिनी एकादशी 2026 कब है?
सन 2026 में मोहिनी एकादशी मई महीने में मनाई जाएगी। यह पावन तिथि वैशाख शुक्ल एकादशी के दिन आती है, जो भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। खासकर जो लोग जीवन में किसी प्रकार की उलझनों, मानसिक तनाव या कर्म बंधन से मुक्त होना चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी बताया गया है।
मोहिनी एकादशी का महत्व (Mahima)
मोहिनी एकादशी का महत्व हमारे शास्त्रों में अत्यंत ऊँचा बताया गया है। यह वही दिन है जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत पिलाया था।
भगवद गीता में भगवान कहते हैं:
“अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते…” (अध्याय 9, श्लोक 22)
अर्थात — जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से मेरा ध्यान करते हैं, मैं उनकी रक्षा स्वयं करता हूँ।
इस व्रत के प्रमुख लाभ:
- पापों का नाश और आत्मशुद्धि
- मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
- वैवाहिक और पारिवारिक सुख में वृद्धि
- मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त
कहा जाता है कि जो भक्त नित्यप्रति श्रद्धा से यह व्रत करते हैं, उनके जीवन में धीरे-धीरे चमत्कारी परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
मोहिनी एकादशी व्रत विधि (Puja Vidhi)
इस व्रत को करने के लिए नियम और विधि का पालन करना बहुत आवश्यक है। आइए सरल तरीके से समझते हैं:
व्रत की शुरुआत कैसे करें:
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
- साफ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु का ध्यान करें
- व्रत का संकल्प लें
पूजा विधि:
- भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं
- तुलसी दल, फल, फूल अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
व्रत के नियम:
- अनाज और तामसिक भोजन का त्याग करें
- दिनभर उपवास रखें (फलाहार कर सकते हैं)
- रात्रि में जागरण और भजन-कीर्तन करें
द्वादशी पारण:
- अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत खोलें
- ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराना शुभ माना जाता है
मोहिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक चंद्रवंशी राजा था जिसका नाम धृष्टबुद्धि था। वह अत्यंत पापी और अधर्मी था। उसके पिता ने उसे राज्य से निकाल दिया।
भटकते हुए वह एक ऋषि के आश्रम पहुँचा। वहाँ ऋषि ने उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने श्रद्धा से व्रत किया और उसके सारे पाप नष्ट हो गए।
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि चाहे मनुष्य कितना भी पापी क्यों न हो, यदि वह सच्चे मन से भगवान विष्णु की शरण में आता है, तो उसका उद्धार निश्चित है।
विभिन्न क्षेत्रों में मोहिनी एकादशी
भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस व्रत को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है।
- उत्तर प्रदेश और बिहार: मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन होते हैं
- दक्षिण भारत: भगवान विष्णु के मंदिरों में अभिषेक और विशेष पूजा होती है
- राजस्थान के एक गाँव में, आज भी लोग पूरी रात जागरण करते हैं और कथा सुनते हैं — वहाँ यह मान्यता है कि इस दिन जागने से सात जन्मों के दोष समाप्त होते हैं
मोहिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?
यह प्रश्न अक्सर लोगों के मन में आता है — “मोहिनी एकादशी क्यों रखी जाती है?”
शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत आत्मा को शुद्ध करने, मोह-माया से मुक्त होने और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति का साधन है।
निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी 2026 केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और भगवान विष्णु के करीब आने का एक दिव्य अवसर है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को किया जाए, तो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि अवश्य आती है।
अंत में बस यही भावना रखें —
“हे विष्णु भगवान, हमें अपने चरणों में स्थान दें और हमारी भक्ति को स्वीकार करें।”
FAQ
Q1. मोहिनी एकादशी 2026 कब है?
उत्तर: यह वैशाख शुक्ल एकादशी को मनाई जाएगी, जो मई 2026 में पड़ेगी।
Q2. मोहिनी एकादशी का व्रत कैसे करें?
उत्तर: सुबह स्नान कर संकल्प लें, भगवान विष्णु की पूजा करें, उपवास रखें और द्वादशी को पारण करें।
Q3. क्या इस दिन फलाहार किया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, फलाहार किया जा सकता है, लेकिन अनाज और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
Q4. मोहिनीएकादशीकामहत्वक्याहै?
उत्तर: यह व्रत पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग खोलता है।
Q5. क्या महिलाएं यह व्रत कर सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएं भी पूर्ण श्रद्धा से यह व्रत कर सकती हैं।
