
कई बार एक छोटी सी तारीख की गलती हमारे बड़े धार्मिक पुण्य को प्रभावित कर देती है।
ऐसा ही कुछ होने वाला है वरुथिनी एकादशी 2026 के साथ।
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल है – 13 अप्रैल या 14 अप्रैल, आखिर सही दिन कौन सा है?
अगर आप भी इस एकादशी का व्रत रखते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
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Varuthini Ekadashi 2026: सही तिथि क्या है?
एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति
हिंदू पंचांग के अनुसार:
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 अप्रैल 2026 – सुबह लगभग 09:15 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल 2026 – सुबह लगभग 11:45 बजे
ऐसे में उदय तिथि (सूर्योदय के आधार पर) को देखते हुए
वरुथिनी एकादशी का व्रत 14 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
13 या 14 अप्रैल का कन्फ्यूजन क्यों?
यह भ्रम इसलिए होता है क्योंकि तिथि कैलेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि चंद्रमा की स्थिति से तय होती है।
13 अप्रैल को तिथि शुरू तो हो जाती है,
लेकिन सूर्योदय के समय पूरी तरह से लागू नहीं होती।
इसलिए धार्मिक दृष्टि से 14 अप्रैल को व्रत रखना ही शुभ और सही माना जाता है।
वरुथिनी एकादशी का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार एक राजा था, जिसने अपने जीवन में कई पाप किए थे।
लेकिन जब उसने श्रद्धा से वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा,
तो उसके सारे पाप धीरे-धीरे समाप्त हो गए और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कहा जाता है कि यह एकादशी:
- पापों का नाश करती है
- सौभाग्य बढ़ाती है
- जीवन में स्थिरता लाती है
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से
हजारों अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा के लिए सबसे शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:30 से 5:30 बजे
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:40 बजे
सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है।
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
पूजा करने का आसान तरीका
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीप जलाएं
- तुलसी दल, फल और पीले फूल अर्पित करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
- दिनभर व्रत रखें और शाम को आरती करें
अगर संभव हो तो रात में जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।
वरुथिनी एकादशी के 5 जरूरी नियम
- इस दिन चावल का सेवन न करें
- झूठ बोलने और क्रोध करने से बचें
- किसी का अपमान न करें
- जरूरतमंदों को दान जरूर करें
- भगवान विष्णु का नाम जपते रहें
व्रत के दौरान क्या खाएं?
अगर आप फलाहार व्रत रखते हैं, तो ये चीजें खा सकते हैं:
- फल (केला, सेब)
- दूध और दही
- साबूदाना खिचड़ी
- सूखे मेवे
ध्यान रखें कि व्रत में सात्विक भोजन ही करें।
पारण (व्रत खोलने का समय)
- पारण तिथि: 15 अप्रैल 2026
- समय: सुबह 6:00 बजे से 8:30 बजे के बीच
सही समय पर पारण करना बेहद जरूरी होता है, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है।
5 महत्वपूर्ण बातें
- व्रत की सही तिथि: 14 अप्रैल 2026
- 13 अप्रैल को तिथि शुरू होती है, लेकिन व्रत नहीं रखा जाएगा
- भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
- चावल और तामसिक भोजन से बचें
- सही समय पर पारण करना जरूरी
FAQs
1. वरुथिनी एकादशी का व्रत किस दिन रखें?
2026 में यह व्रत 14 अप्रैल को रखा जाएगा।
2. क्या 13 अप्रैल को व्रत रख सकते हैं?
नहीं, क्योंकि सूर्योदय के अनुसार सही तिथि 14 अप्रैल को ही है।
3. इस व्रत से क्या लाभ मिलता है?
पापों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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Conclusion
वरुथिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सुधारने का एक अवसर है।
अगर सही तिथि और विधि से इस व्रत को किया जाए, तो यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
