“रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया…” Rama Rama Ratte Ratte Biti Re Umariya Lyrics in Hindi

“रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया…” Rama Rama Ratte Ratte Biti Re Umariya Lyrics in Hindi
“रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया…” Rama Rama Ratte Ratte Biti Re Umariya Lyrics in Hindi

“रामा रामा रटते रटते, बीती रे उमरिया…” — ये सिर्फ एक भजन की पंक्ति नहीं, बल्कि उस भक्त के हृदय की पुकार है जिसने अपना पूरा जीवन प्रभु श्रीराम के नाम में समर्पित कर दिया। शबरी की तरह हर भक्त के मन में यही इंतजार होता है कि कब भगवान उसके जीवन में आएँ और उसके प्रेम को स्वीकार करें। यह भजन उसी अटूट विश्वास, प्रेम और भक्ति की गहराई को दर्शाता है, जो सीधे आत्मा को छू जाती है।

Rama Rama Ratte Ratte Biti Re Umariya Lyrics (Hindi – Full Correct Version)

रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥

मैं शबरी भिलनी की जाई,
भजन भाव ना जानु रे ।
राम तेरे दर्शन के हित,
वन में जीवन पालूं रे ।
चरणकमल से निर्मल करदो,
दासी की झोपड़िया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

रोज सवेरे वन में जाकर,
फल चुन चुन कर लाऊंगी ।
अपने प्रभु के सन्मुख रख के,
प्रेम से भोग लगाऊँगी ।
मीठे मीठे बेरों की मैं,
भर लाई छबरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

श्याम सलोनी मोहिनी मूरत,
नैयनो बीच बसाऊंगी ।
सुबह शाम नित उठकर मै तो,
तेरा ध्यान लगाऊँगी ।
पद पंकज की रज धर मस्तक,
जीवन सफल बनाउंगी ।
अब क्या प्रभु जी भूल गए हो,
दासी की डगरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

नाथ तेरे दर्शन की प्यासी,
मैं अबला इक नारी हूँ ।
दर्शन बिन दोऊ नैना तरसें,
सुनलो बहुत दुखारी हूँ ।
हरी रूप में दर्शन देदो,
डालो एक नजरिया ॥
॥ रामा रामा रटते रटते..॥

रामा रामा रटते रटते,
बीती रे उमरिया ।
रघुकुल नंदन कब आओगे,
भिलनी की डगरिया ॥

भजन का गहरा अर्थ (Shabari Bhakti Explained)

यह भजन सीधे तौर पर माता शबरी की भक्ति को दर्शाता है, जिनका उल्लेख रामायण में मिलता है।

इस भजन में तीन गहरे भाव छिपे हैं:

  • अटूट प्रतीक्षा – वर्षों तक प्रभु का इंतजार
  • निर्मल प्रेम – बिना किसी स्वार्थ के भक्ति
  • सरलता – बिना ज्ञान के भी सच्ची भक्ति संभव है

अंतिम भाव

rama rama ratte ratte biti re umariya lyrics” केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक संदेश है —
अगर भक्ति सच्ची हो, तो भगवान खुद आपके द्वार आते हैं… जैसे श्रीराम शबरी के पास आए थे।

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