Vikat Sankashti Chaturthi 2026: घर पर ऐसे करें पूजा, नहीं तो अधूरा रह सकता है व्रत!

Vikat Sankashti Chaturthi

कभी-कभी जीवन में परेशानियाँ इतनी बढ़ जाती हैं कि हर रास्ता बंद सा लगने लगता है। ऐसे समय में भगवान गणेश की कृपा ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।
विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत उन खास दिनों में से एक है, जब सच्चे मन से की गई पूजा हर संकट को दूर कर सकती है।
अगर आप भी इस व्रत को सही तरीके से करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है।

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विकट संकष्टी चतुर्थी क्या है?

विकट संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है।
यह हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है, लेकिन “विकट” संकष्टी का अपना अलग महत्व होता है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं।
“विकट” का अर्थ है कठिन — यानी कठिन समस्याओं को हल करने वाला दिन।

2026 में विकट संकष्टी चतुर्थी कब है?

2026 में यह व्रत (तिथि के अनुसार) खास शुभ योग में पड़ेगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूरा होता है।

घर पर विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें?

1. सुबह की शुरुआत शुद्धता से करें

सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
मन को शांत रखें — क्योंकि पूजा केवल विधि नहीं, भावना भी होती है।

2. पूजा स्थान तैयार करें

घर के मंदिर या किसी साफ जगह पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
लाल या पीले कपड़े पर उन्हें विराजमान करें।

3. पूजा सामग्री रखें

धूप, दीप, फूल, दूर्वा, मोदक, फल और जल तैयार रखें।
गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा और मोदक अति प्रिय होते हैं।

4. मंत्र और आरती करें

“ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
इसके बाद गणेश जी की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामना कहें।

5. चंद्रमा को अर्घ्य देना न भूलें

शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद जल अर्पित करें।
इसके बाद ही व्रत खोलें — यही इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

एक छोटी सी कहानी

एक बार एक व्यापारी था, जिसका हर काम बिगड़ जाता था।
कर्ज बढ़ता गया और घर में तनाव बढ़ने लगा।

किसी ने उसे विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने की सलाह दी।
पहले तो उसने इसे सामान्य पूजा समझा, लेकिन फिर पूरे नियम से व्रत रखा।

पहले महीने कुछ नहीं बदला…
दूसरे महीने छोटे-छोटे काम बनने लगे…
और तीसरे महीने उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

यह कहानी हमें बताती है — आस्था और नियमितता मिलकर चमत्कार करती हैं।

पूजा के जरूरी नियम

  • व्रत के दिन झूठ, क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें
  • पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखें (क्षमता अनुसार)
  • पूजा के समय पूरी श्रद्धा और ध्यान रखें
  • चंद्रमा के दर्शन के बिना व्रत न खोलें
  • गणेश जी को दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाएं

व्रत करने के फायदे

मानसिक शांति

मन शांत होता है और तनाव कम होता है।

आर्थिक सुधार

धन संबंधित समस्याएं धीरे-धीरे खत्म होती हैं।

बाधाओं का नाश

जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।

पारिवारिक सुख

घर में खुशहाली और प्रेम बढ़ता है।

मनोकामना पूर्ति

सच्चे मन से मांगी गई इच्छा पूरी होती है।

FAQs

Q1. क्या महिलाएं विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत रख सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा से यह व्रत रख सकती हैं।

Q2. अगर चंद्रमा दिखाई न दे तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में पंचांग के अनुसार चंद्र दर्शन का समय मानकर अर्घ्य दें।

Q3. क्या व्रत में पानी पी सकते हैं?

हाँ, अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण कर सकते हैं।

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Conclusion

विकट संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने का एक माध्यम है।
जब आप सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करते हैं, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।

अगर आप भी जीवन की परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो इस बार इस व्रत को पूरे विश्वास के साथ जरूर करें।
शायद यही वो दिन हो… जो आपकी किस्मत बदल दे।

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