Chaiti Chhath 2026: आज है खरना! 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत, जानें क्यों है ये सबसे खास दिन

Chaiti Chhath 2026 Kharna

चैती छठ का हर दिन आस्था, संयम और विश्वास की एक नई कहानी लेकर आता है।
आज का दिन यानी खरना व्रतियों के लिए बेहद खास और भावनात्मक होता है।
इस दिन से शुरू होता है 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत, जो श्रद्धा की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि यह व्रत इतना कठिन क्यों होता है और इसके पीछे क्या रहस्य छिपा है?

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खरना क्या है और क्यों है इतना खास?

चैती छठ का दूसरा दिन खरना कहलाता है।
इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।

खरना के प्रसाद में गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है।
इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करते हैं।

यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा की गहरी साधना है।

36 घंटे का निर्जला व्रत: आस्था की सबसे कठिन परीक्षा

खरना के बाद शुरू होता है 36 घंटे का व्रत, जिसमें न खाना होता है और न ही पानी पीना।
इसे छठ पूजा का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है।

इस दौरान व्रती पूरी शुद्धता और नियमों का पालन करते हैं।
उनकी दिनचर्या पूरी तरह पूजा और साधना में बदल जाती है।

इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व

  • यह व्रत मन और शरीर दोनों को शुद्ध करता है
  • आत्मसंयम और सहनशीलता को बढ़ाता है
  • सूर्य देव और छठी मैया की कृपा प्राप्त होती है
  • परिवार की सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है

खरना की पूजा विधि

खरना की पूजा बहुत ही सरल लेकिन नियमबद्ध होती है।

पूजा की तैयारी

व्रती सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनते हैं।
घर और रसोई को पूरी तरह साफ किया जाता है।

प्रसाद बनाना

गुड़ की खीर, रोटी और केला प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है।
खाना पूरी तरह शुद्धता से बिना नमक और लहसुन-प्याज के बनता है।

पूजा और प्रसाद ग्रहण

शाम को सूर्यास्त के समय पूजा की जाती है।
इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और व्रत शुरू होता है।

खरना से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी

एक छोटे से गांव में सीता नाम की महिला हर साल छठ व्रत करती थी।
एक बार वह बहुत बीमार थी, लेकिन उसने व्रत नहीं छोड़ा।

खरना के दिन उसने पूरी श्रद्धा से पूजा की और 36 घंटे का व्रत रखा।
लोगों ने उसे रोका, लेकिन उसका विश्वास अडिग था।

कहते हैं कि छठी मैया की कृपा से वह जल्द ही स्वस्थ हो गई।
यह कहानी बताती है कि सच्ची श्रद्धा में कितनी शक्ति होती है।

खरना के दिन ध्यान रखने वाली 5 जरूरी बातें

  • व्रत के दौरान शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
  • प्रसाद बनाने में पूरी पवित्रता बनाए रखें
  • किसी भी तरह का नकारात्मक विचार मन में न लाएं
  • व्रत के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें
  • सूर्यास्त के समय पूजा जरूर करें

खरना के बाद क्या होता है?

खरना के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं।
इसके बाद तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है।

चौथे दिन सुबह उषा अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है।
इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

छठ पूजा का असली संदेश

छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है।
यह हमें सिखाता है कि अनुशासन, श्रद्धा और संयम से जीवन में हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

1. खरना के दिन क्या खाया जाता है?

खरना के दिन गुड़ की खीर, रोटी और केला प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

2. 36 घंटे का व्रत क्यों रखा जाता है?

यह व्रत आत्मसंयम, शुद्धता और सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है।

3. क्या खरना के बाद पानी पी सकते हैं?

नहीं, खरना के बाद 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखा जाता है।

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Conclusion

चैती छठ का खरना सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास और भक्ति का प्रतीक है।
यह व्रत हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।

अगर आप भी इस व्रत को करने की सोच रहे हैं, तो पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करें।
क्योंकि छठी मैया की कृपा से हर मनोकामना जरूर पूरी होती है।

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