
20 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि रात 02:31 बजे तक रहेगी, इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन रेवती नक्षत्र रात 02:27 बजे तक रहेगा और उसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा। योग की बात करें तो ब्रह्म योग रात 10:14 बजे तक रहेगा, इसके बाद इन्द्र योग लगेगा। करण में बालव करण दोपहर 03:44 बजे तक रहेगा, उसके बाद कौलव करण रात 02:31 बजे तक और फिर तैतिल करण शुरू होगा। इस दिन सूर्य मीन राशि में रहेगा, जबकि चंद्रमा 21 मार्च रात 02:27 बजे तक मीन राशि में रहेगा और उसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेगा।
दिन में कुछ समय ऐसे हैं जिन्हें ज्योतिष के अनुसार अशुभ माना जाता है, इसलिए इन समयों में नए या महत्वपूर्ण काम शुरू करने से बचना चाहिए। कुलिक काल सुबह 08:04 से 09:34 बजे तक रहेगा, दुर्मुहूर्त सुबह 08:58 से 09:46 बजे तक और दोपहर 12:58 से 01:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगण्ड दोपहर 03:34 से 05:04 बजे तक रहेगा और वर्ज्यम् दोपहर 03:15 से 04:44 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। जिन लोगों का मघा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तर फाल्गुनी के पहले चरण नक्षत्र है, उनके लिए यह समय चंद्राष्टम का प्रभाव दे सकता है। साथ ही इस दिन रेवती और अश्विनी दोनों गण्डमूल नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा।
अगर शुभ समय की बात करें तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:57 से 05:45 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ, ध्यान और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:58 बजे तक रहेगा, जिसमें महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए जा सकते हैं। वहीं अमृत काल रात 12:11 से 01:41 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च सुबह 04:04 बजे से 21 मार्च 02:27 बजे तक रहेगा और फिर 21 मार्च को अश्विनी नक्षत्र के साथ दोबारा सर्वार्थसिद्धि योग बनेगा। साथ ही अमृतसिद्धि योग भी 20 मार्च सुबह 06:34 से 21 मार्च 02:27 बजे तक रहेगा, जिन्हें ज्योतिष में बहुत ही शुभ और सफलता देने वाला योग माना जाता है।
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