
साल 2026 में पड़ने वाला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू धर्म में ग्रहण को केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।
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चंद्र ग्रहण कब और क्यों लगता है? (वैज्ञानिक कारण)
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण लगता है।
यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो पूर्णिमा तिथि को ही संभव होती है। ग्रहण आंशिक, पूर्ण या उपछाया (Penumbral) प्रकार का हो सकता है।
पौराणिक कथा: राहु-केतु और समुद्र मंथन
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चंद्र ग्रहण की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। इसका वर्णन स्कंद पुराण के अवंति खंड में मिलता है।
जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उसमें से अमृत निकला। अमृत को पाने के लिए देवताओं और असुरों में संघर्ष हुआ।
एक असुर जिसका नाम स्वरभानु था, उसने देवता का रूप धारण कर अमृत पी लिया। लेकिन सूर्य और चंद्रमा ने उसकी पहचान कर ली और इसकी सूचना भगवान विष्णु को दी।
भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। चूंकि उसने अमृत पी लिया था, इसलिए उसका सिर और धड़ दोनों अमर हो गए।
- सिर को राहु कहा गया
- धड़ को केतु नाम मिला
तभी से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से शत्रुता रखने लगे।
राहु क्यों निगलता है चंद्रमा?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भी राहु को अवसर मिलता है, वह चंद्रमा को निगलने की कोशिश करता है। इसी कारण चंद्र ग्रहण की घटना घटित होती है।
हालांकि राहु केवल सिर है और उसका धड़ नहीं है, इसलिए वह चंद्रमा को पूरी तरह निगल नहीं पाता। कुछ समय बाद चंद्रमा फिर से सामान्य रूप में दिखाई देने लगता है।
यही कारण है कि ग्रहण सीमित समय के लिए ही रहता है।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में:
- मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है
- ग्रहण के बाद स्नान और दान करने की परंपरा है
- मंदिरों के कपाट ग्रहण के दौरान बंद रखे जाते हैं
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। इसलिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव मानसिक स्थिति, निर्णय क्षमता और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ सकता है।
कई लोग ग्रहण के दौरान ध्यान और साधना को अधिक फलदायी मानते हैं।
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निष्कर्ष
Chandra Grahan 2026 केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की गहरी पौराणिक कथा से जुड़ी हुई परंपरा है। राहु-केतु और चंद्रमा की यह कहानी सदियों से लोगों की आस्था और विश्वास का हिस्सा रही है।


