
“मंगल की सेवा सुन मेरी देवा” एक लोकप्रिय हनुमान भजन है, जिसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मंगलवार को विशेष रूप से गाया जाता है। इस भजन में भक्त अपनी मनोकामनाएँ, संकटों से मुक्ति और शक्ति-बुद्धि का वरदान पवनपुत्र हनुमान जी से प्रार्थना के रूप में मांगता है। सरल शब्दों, मधुर भाव और गहरी आस्था के कारण यह भजन हर उम्र के भक्तों को प्रिय है।
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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा लिरिक्स (Hindi Lyrics)
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़ा।
हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़ा॥
कष्ट हर ले, संकट टाल दे,
दीनदयाल हे वीर बजरंग बली।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा॥
ज्ञान बल बुद्धि दे दे मुझको,
भक्ति का वरदान दिला दे मुझको।
तेरे नाम का दीप जला दे,
जीवन पथ उजियार कर दे।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा॥
भूत-प्रेत सब दूर भगाओ,
दुख दरिद्र सब काट गिराओ।
राम नाम का सुमिरन करवा,
मन मंदिर में राम बसा।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा॥
तू ही सहारा तू ही सहायक,
तेरे बिना कौन है नायक।
शरण में आया दास तुम्हारा,
कर दो जीवन पार हमारा।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा॥
नोट: अलग-अलग परंपराओं और गायकों के अनुसार शब्दों में हल्का-सा अंतर मिल सकता है, लेकिन भाव वही रहता है—हनुमान जी की कृपा और संरक्षण की प्रार्थना।
भजन का भावार्थ (Meaning & Bhavarth)
इस भजन में भक्त मंगलवार के पावन अवसर पर हनुमान जी से सेवा स्वीकार करने, बुद्धि-बल देने, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने और जीवन के कष्ट दूर करने की विनती करता है। राम नाम के सुमिरन से मन को स्थिर और जीवन को उज्ज्वल बनाने का संदेश मिलता है।
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कब और कैसे करें पाठ?
- दिन: मंगलवार
- समय: प्रातः या संध्या
- विधि: हनुमान जी के चित्र/मूर्ति के सामने दीप जलाकर, सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें और श्रद्धा से भजन गाएँ।
- लाभ: मन की शांति, आत्मबल में वृद्धि, बाधाओं से राहत।


