
महामृत्युंजय मंत्र को सनातन धर्म में अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी मंत्र माना गया है। यह मंत्र विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है और जीवन में रोग, भय, अकाल मृत्यु तथा मानसिक कष्टों से रक्षा करता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि सोमवार के दिन विधि-विधान से इस मंत्र का जाप किया जाए, तो इसके प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं।
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महामृत्युंजय मंत्र का महत्व
यह मंत्र व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाने के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक शांति प्रदान करता है। इसे “मृत्यु पर विजय दिलाने वाला मंत्र” भी कहा जाता है। नियमित जाप से जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास होता है।
सोमवार को महामृत्युंजय मंत्र जाप क्यों करें?
सोमवार का दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और भस्म अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से:
- गंभीर रोगों में राहत मिलती है
- भय, तनाव और नकारात्मक विचार दूर होते हैं
- लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूर्ण होती है
- जीवन में आने वाले बड़े संकट टल सकते हैं
महामृत्युंजय मंत्र जाप की सही विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा के सामने बैठें
- दीपक और धूप जलाएं
- रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार मंत्र जाप करें
- जाप के समय मन को पूरी तरह एकाग्र रखें
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महामृत्युंजय मंत्र के प्रमुख लाभ
- मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि
- रोग, दुर्घटना और अनहोनी से सुरक्षा
- नकारात्मक ग्रह प्रभावों में कमी
- जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
यह मंत्र केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि मन और शरीर दोनों को संतुलन प्रदान करता है। श्रद्धा और नियम के साथ किया गया जाप जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है।


