
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आंवला एकादशी को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के वृक्ष का पूजन करने से व्यक्ति को सुख, सौभाग्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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नवविवाहित महिलाओं के लिए क्यों खास है आंवला एकादशी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आंवला एकादशी का व्रत विशेष रूप से नवविवाहित महिलाओं के लिए शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और स्थिरता बनी रहती है। साथ ही पति की लंबी आयु और परिवार में सुख-शांति की कामना भी पूर्ण होती है।
आंवला एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना गया है। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे दीपदान, परिक्रमा और पूजा करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त 2026
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आमलकी एकादशी की तिथि और समय कुछ इस प्रकार है.
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, सुबह 12:33 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे तक
- व्रत की तिथि: उदया तिथि के अनुसार, 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को ही यह व्रत रखा जाएगा.
व्रत से मिलने वाले लाभ
- वैवाहिक जीवन में सुख और सामंजस्य
- पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास में वृद्धि
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि
- मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा
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आंवला एकादशी व्रत विधि (संक्षेप में)
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। आंवले के वृक्ष की पूजा करें, दीप जलाएं और परिक्रमा करें। दिनभर उपवास रखें और शाम को विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें।
