
मां सरस्वती — ज्ञान, बुद्धि, कला और शिक्षा की देवी — की यह वंदना विशेष रूप से बसंत पंचमी के अवसर पर गाई जाती है। श्रद्धा से पढ़ने से मन में शांति, स्पष्टता, और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
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वंदना के बोल (लिरिक्स)
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी,
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
जग सिरमौर बनाएँ भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी…
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमर कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी…
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम,
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा मां,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥
हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी…
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
भजन का अर्थ (संक्षिप्त व्याख्या)
- हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी, अम्ब विमल मति दे
माँ सरस्वती से निवेदन है कि हमें शुद्ध, निर्मल बुद्धि और ज्ञान दें। - जग सिरमौर बनाएँ भारत
देश और समाज में बल, साहस और आदर्श गुणों को उत्साहित करने का अनुरोध। - साहस, संयम, सत्य, स्नेह
वंदना में ऐसे गुणों की कामना की जाती है जो व्यक्ति को जीवन में सफलता, आत्म-विश्वास और नैतिकता प्रदान करें। - लव-कुश, ध्रुव, प्रहलाद
पौराणिक पात्र जिन्हें उत्कृष्ट गुणों, दृढ़ता और विश्वास के प्रतीक माना जाता है — इन्हें उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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यह भजन कब पढ़ें?
- बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के दिन
- पढ़ाई, कला, संगीत या परीक्षा से पहले
- जब बुद्धि, एकाग्रता और मानसिक शक्ति की आवश्यकता हो

