
पौराणिक कथाओं में भगवान शिव को करुणा, न्याय और धर्म का रक्षक बताया गया है। जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा और निर्दोषों पर अत्याचार हुआ, तब-तब शिव ने किसी न किसी रूप में हस्तक्षेप किया। ऐसी ही एक कम चर्चित लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण कथा भगवान शिव के वृषभ (बैल) अवतार से जुड़ी हुई है।
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कथा के अनुसार क्या हुआ था?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय पृथ्वी पर कुछ अहंकारी और अत्याचारी शक्तियाँ धर्म का नाश कर रही थीं। साधु-संतों, गौवंश और निर्दोष प्राणियों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा था। लोग भयभीत थे और धर्म का पालन कठिन होता जा रहा था।
तभी देवताओं और ऋषि-मुनियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस अन्याय को समाप्त करें और धर्म की रक्षा करें।
क्यों लिया शिव ने वृषभ रूप?
भगवान शिव ने देखा कि यदि वे अपने दिव्य रूप में प्रकट होंगे तो अधर्मी शक्तियाँ तुरंत पहचान लेंगी और छल का सहारा लेंगी। इसलिए शिव ने वृषभ यानी बैल का रूप धारण किया, जो धर्म, सेवा और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है।
इस रूप में उन्होंने अत्याचारियों के घमंड को तोड़ा और यह संदेश दिया कि शक्ति का वास्तविक अर्थ दूसरों की रक्षा करना होता है, न कि उन्हें कष्ट देना।
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वृषभ अवतार का महत्व
वृषभ अवतार यह सिखाता है कि भगवान केवल सिंहासन या स्वर्ग में नहीं, बल्कि साधारण रूप में भी धर्म की रक्षा कर सकते हैं। यही कारण है कि आज भी भगवान शिव के साथ नंदी को विशेष स्थान प्राप्त है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर इस कथा का स्मरण करने से यह समझ आता है कि शिव केवल संहारक नहीं, बल्कि करुणा और न्याय के प्रतीक भी हैं।


