
श्री रामायण जी केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। जब भी मन अशांत हो, जब रास्ता साफ न दिखे — तब shri ramayan ji के शब्द हमें धैर्य, मर्यादा और भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। इसी दिव्य ग्रंथ की आराधना के लिए गाई जाने वाली shree ramayan ji ki aarti घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है।
आज हम यहाँ आपके लिए लेकर आए हैं shree ramayan ji ki aarti lyrics, ताकि आप रोज़ पूजा के समय पूरे भाव से इसका पाठ कर सकें।
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श्री रामायण जी की आरती
आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद ।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद ।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
गावत बेद पुरान अष्टदस ।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतान को सरबस ।
सार अंश सम्मत सब ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
गावत संतत शंभु भवानी ।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी ।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी ।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥
दलनि रोग भव मूरि अमी की ।
तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥
आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
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आरती का महत्व
shree ramayan ji ki aarti करने से घर का वातावरण शांत और पवित्र बनता है। माना जाता है कि नियमित रूप से shri ramayan ji की आरती करने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं, रिश्तों में मधुरता बढ़ती है और जीवन में सही दिशा मिलती है।
अगर आप सुबह या संध्या समय पूरे मन से यह shree ramayan ji ki aarti lyrics पढ़ते हैं, तो राम कृपा स्वतः ही जीवन में प्रवाहित होने लगती है।
