
Shiv Kailasho Ke Wasi” केवल एक भजन नहीं है, यह हर शिव भक्त के दिल की आवाज़ है। जब भी यह भजन सुनाई देता है, मन अपने-आप कैलाश पर्वत की ओर चला जाता है — जहाँ भोलेनाथ ध्यान में लीन रहते हैं, गले में नाग, माथे पर चंद्रमा और हाथ में त्रिशूल लिए।
इस भजन की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरलता है। कोई भारी शब्द नहीं, कोई दिखावा नहीं — बस भोले बाबा से सीधी बात।
जो भी श्रद्धा से shiv kailasho ke wasi lyrics in hindi पढ़ता या गुनगुनाता है, उसे मन की शांति अपने-आप मिलने लगती है।
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शिव कैलाशो के वासी भजन (Shiv Kailasho Ke Vasi)
शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
अंत बेअंत तेरी माया,
ओ भोले बाबा,
अंत बेअंत तेरी माया,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
शिव जी के मन को लुभायें,
ओ भोले बाबा,
शिव जी के मन को लुभायें
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
एक था डेरा तेरा,
चम्बे रे चौगाना,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
ओ भोले बाबा,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
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अंतिम शब्द
अगर आप सच्चे शिव भक्त हैं, तो “Shiv Kailasho Ke Wasi” आपके लिए सिर्फ गीत नहीं, एक अनुभव है। इसे पढ़िए, सुनिए और दिल से महसूस कीजिए।
भोले बाबा आपकी हर मनोकामना पूरी करें।
हर हर महादेव! 🕉️


