
20 फरवरी को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी, जो दोपहर 02:38 बजे तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। इस दिन कालयुक्त संवत्सर के अंतर्गत विक्रम संवत 2082 तथा शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर) चल रहा है। नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा रात्रि 08:07 बजे तक रहेगा, उसके बाद रेवती नक्षत्र प्रारंभ होगा। साध्य योग सायं 06:23 बजे तक रहेगा, इसके बाद शुभ योग बनेगा। करण में गर करण दोपहर 02:38 बजे तक, उसके बाद वणिज करण रात्रि 01:52 बजे तक और फिर विष्टि करण रहेगा। इस दिन सूर्य कुंभ राशि में स्थित रहेगा तथा चन्द्रमा पूरे दिन-रात मीन राशि में संचार करेगा।
दिन के अशुभ समय की बात करें तो यमगण्ड काल दोपहर 03:30 बजे से 04:56 बजे तक रहेगा, कुलिक काल सुबह 08:24 बजे से 09:50 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त का समय प्रातः 09:16 बजे से 10:01 बजे तक तथा दोपहर 01:03 बजे से 01:48 बजे तक रहेगा। वहीं वर्ज्यम् काल सुबह 06:09 बजे से 07:42 बजे तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों से बचना उचित माना जाता है। हालांकि इस दिन कुछ विशेष शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध रहेंगे, जिनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:22 बजे से 06:10 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 बजे से 01:03 बजे तक तथा अमृत काल दोपहर 02:55 बजे से 04:28 बजे तक रहेगा, जो मांगलिक एवं महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन विशेष शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है। अमृतसिद्धि योग 20 फरवरी रात्रि 08:07 बजे से 21 फरवरी सुबह 06:58 बजे तक रहेगा, साथ ही इसी अवधि में सर्वार्थसिद्धि योग भी रहेगा, जो सभी प्रकार के कार्यों की सफलता के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। चन्द्राष्टम का प्रभाव मघा, पूर्वा फाल्गुनी तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण वालों पर रहेगा, इसलिए इन राशि वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसके अतिरिक्त 20 फरवरी रात्रि 08:07 बजे से 21 फरवरी सायं 07:07 बजे तक रेवती नक्षत्र के कारण गण्डमूल नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है।
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