
सोमवार व्रत कथा (Somvar Vrat Katha) — महत्व, विधि, नियम और पूरी कथा
हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। शिवभक्त इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, मंत्र जाप करते हैं और परिवार व जीवन में शांति, सुख, समृद्धि और मनोकामना-पूर्ति की कामना करते हैं। सोमवार व्रत का महत्व अत्यंत प्राचीन है और इसकी चर्चा अनेक पुराणों और लोक परंपराओं में मिलती है। सोमवार व्रत रखते समय somvar vrat katha का पाठ करना बहुत आवश्यक माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि कथा का श्रवण व वाचन व्रत को पूर्णता देता है और शिव कृपा को सहज रूप से प्राप्त कराने वाला माना जाता है।
सोमवार व्रत साधारण सोमवार, सोलह सोमवार, श्रावण सोमवार, और प्रदोष सोमवार जैसे कई रूपों में किया जाता है। हर प्रकार के सोमवार व्रत की अपनी मान्यता है, पर सभी का उद्देश्य भगवान शिव की आराधना और जीवन की समस्याओं से मुक्ति प्राप्त करना है।
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सोमवार व्रत का महत्व
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन है। ‘सोम’ का अर्थ होता है चंद्रमा। चंद्रदेव को भगवान शिव के जटाओं में स्थान प्राप्त है, इसलिए सोमवार को चंद्रमा तथा शिव दोनों का प्रभाव माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि सोमवार का व्रत जीवन में शांति लाता है और मानसिक उतार-चढ़ाव को शांत करता है। सोमवार व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है जो विवाह में विलंब, दांपत्य कलह, संतान प्राप्ति की इच्छा, आर्थिक अवरोध या मानसिक तनाव से गुजर रहे हों।
जो भी भक्त श्रद्धा और नियम से सोमवार व्रत करता है, उसके जीवन में शिव कृपा अवश्य प्राप्त होती है। यह व्रत मनोकामना-पूर्ति का सिद्ध साधन माना गया है। विशेष रूप से सोलह सोमवार का व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि जिसने भी इसे पूर्ण श्रद्धा से पूरा किया, उसकी हर मनोकामना पूर्ण हुई।
सोमवार व्रत की विधि
सोमवार व्रत प्रातःकाल स्नान करके, स्वच्छ वस्त्र धारण करके शुरू किया जाता है। इसके बाद मन में भगवान शिव का ध्यान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
पूजा का क्रम इस प्रकार है:
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, अक्षत, भस्म और सफेद फूल चढ़ाएँ।
- धूप, दीप प्रज्वलित करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
- पूजा के बाद सच्ची श्रद्धा से somvar vrat katha का श्रवण करें।
शाम को भी शिवलिंग पर जल चढ़ाकर दीपक जलाना शुभ माना गया है। अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
सोमवार व्रत के नियम
सोमवार व्रत में शुद्धता और सत्यनिष्ठा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। व्रतकर्ता को क्रोध, झूठ, अभद्र भाषा, अनैतिक आचरण से दूर रहना चाहिए। दिनभर फलाहार या केवल जल-दूध से ही व्रत रखने की परंपरा है, लेकिन स्वास्थ्य के अनुसार विकल्प अपनाया जा सकता है। व्रत में कांदा-लहसुन का सेवन वर्जित है।
व्रत के दौरान किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाएँ, सेवा-दान करें, और मन में शांत भाव रखें। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमपूर्वक सोमवार व्रत करता है, उसके जीवन में शिव कृपा स्थायी होती है।
सोमवार व्रत कथा (Somvar Vrat Katha) — प्रामाणिक कथा
एक बार की बात है। एक नगर में एक सम्पन्न और धर्मपरायण व्यापारी रहता था। उसका जीवन सुख-सुविधाओं से भरा हुआ था, परंतु उसके घर में संतान नहीं थी। वह और उसकी पत्नी इस कमी से अत्यंत दुखी रहते थे। व्यापारी शिवभक्त था और हर सोमवार मंदिर में जल चढ़ाता था, पर फिर भी उसकी मनोकामना पूरी नहीं हो रही थी।
एक दिन व्यापारी अत्यंत दुखी मन से शिव मंदिर पहुँचा। वहाँ उसने कई घंटे ध्यान किया और अपनी समस्या शिवजी के सामने रखी।
उसी समय एक दिव्य पुरुष, जो वास्तव में भगवान शिव के गण थे, वहाँ प्रकट हुए। उन्होंने व्यापारी से पूछा — “हे भक्त! तुम इतने दुखी क्यों हो?” व्यापारी ने कहा — “मैं शिवभक्त हूँ। जीवन में धन-संपत्ति सब है, पर संतान नहीं है। कुछ भी कर लूँ, यह इच्छा पूरी नहीं होती। कृपा कर कोई उपाय बताइए।”
दिव्य पुरुष मुस्कुराए और बोले —
“हे व्यापारी! यदि तुम सच्चे मन से 16 सोमवार व्रत रखो और हर सोमवार श्रद्धा एवं पूर्ण विधि से somvar vrat katha का श्रवण करो, तो तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी। भगवान शिव तुम्हें संतान-सुख अवश्य प्रदान करेंगे।”
व्यापारी ने श्रद्धा से सिर झुकाया और उसी दिन से व्रत आरंभ कर दिया।
व्रत की तपस्या और चमत्कारी फल
16 सोमवार तक व्यापारी और उसकी पत्नी ने अत्यंत नियम, शुद्धता और भक्ति के साथ व्रत किया। वे हर सोमवार शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाते, फूल और बेलपत्र अर्पित करते और कथा का श्रवण करते।
उनकी भक्ति देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और एक दिन व्यापारी के स्वप्न में प्रकट हुए।
शिवजी ने कहा —
“वत्स! तुम्हारी भक्ति और व्रत के प्रभाव से मैं प्रसन्न हूँ। तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी। तुम्हारे घर में शीघ्र ही एक तेजस्वी पुत्र जन्म लेगा।”
स्वप्न समाप्त होते ही व्यापारी अत्यंत आनंदित हुआ। कुछ महीनों बाद उसकी पत्नी गर्भवती हुई और निर्दिष्ट समय पर एक सुंदर, स्वस्थ और तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ।
यह देखकर नगर के लोग कहने लगे कि व्यापारी ने दृढ़ निष्ठा से सोमवार व्रत का पालन किया और शिवजी की कृपा पाई। उस दिन से व्यापारिक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि निरंतर बनी रही।
सोमवार व्रत कथा का आगे का प्रसंग
कुछ समय बाद जब बच्चा बड़ा होने लगा, एक दिन व्यापारी व्यापार के सिलसिले में बाहर गया। जाते समय उसने अपने पुत्र को पड़ोसी के घर छोड़ दिया। समय बीतता गया, पर व्यापारी वापस नहीं आया। उसका व्यापार में नुकसान हो गया था और वह निराश होकर किसी और शहर चला गया।
इधर, घर पर व्यापारिणी को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन उसने हार नहीं मानी और हर सोमवार व्रत करती रही। वह मंदिर जाती, जल चढ़ाती और भगवान शिव से अपने पति की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती।
इधर व्यापारी कई कठिनाइयों से होते हुए एक दिन एक शिव मंदिर पहुँचा। उस दिन सोमवार था। मंदिर में कथा हो रही थी। व्यापारी ने वर्षों बाद पहली बार somvar vrat katha सुनी। कथा पूरी होते ही उसके मन का अंधकार मिटने लगा।
उसी रात शिवजी ने उसे स्वप्न में कहा —
“वत्स, तुम्हारी विपत्ति अब समाप्त होगी। घर जाओ, तुम्हारा परिवार तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।”
अगले ही दिन व्यापारी घर लौटा और उसने देखा कि उसका परिवार सुरक्षित है। उसकी पत्नी ने सोमवार व्रत की प्रभावशाली शक्ति से परिवार को कठिनाइयों से बचाए रखा था। व्यापारी ने पत्नी को गले लगाया और कहा —
“आज मुझे मालूम हुआ कि व्रत और कथा की शक्ति कितनी महान है।”
उस दिन से पूरे परिवार ने नियमपूर्वक श्रद्धा के साथ सोमवार का उपवास करना प्रारंभ किया और भगवान शिव को अपनी जीवनधारा का केंद्र मान लिया।
सोमवार व्रत के आध्यात्मिक लाभ
सोमवार व्रत केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति का साधन नहीं है, बल्कि गहन आध्यात्मिक साधना का मार्ग भी है। यह भक्त के मन को शांत करता है, चित्त को स्थिर करता है और क्रोध, तनाव, भय तथा नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
शिवजी ‘आशुतोष’ हैं — अर्थात् अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले। मन की पवित्रता और सच्ची भक्ति से उपवास करने पर शिवजी की कृपा बहुत जल्दी मिलती है।
इस व्रत से व्यक्ति में धैर्य, करुणा, संयम, सत्य और तप की प्रवृत्ति बढ़ती है। परिवार में सामंजस्य आता है और आपसी प्रेम में वृद्धि होती है।
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निष्कर्ष
सोमवार व्रत और somvar vrat katha हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है। यह व्रत केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला, मन को संयमित करने वाला और परिवार में स्थिरता व शांति स्थापित करने वाला आध्यात्मिक अभ्यास है।
श्रद्धा, नियम, संयम और सत्य के साथ किया गया सोमवार व्रत जीवन की हर बाधा को दूर करने की शक्ति रखता है। भगवान शिव अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से सोमवार व्रत करता है और कथा का श्रवण करता है, वह शिव कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
