
भूमिका
निर्वाण षट्कम् (Nirvana Shatakam) अद्वैत वेदांत का एक अत्यंत प्रसिद्ध और गूढ़ स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य ने की थी। यह स्तोत्र आत्म-तत्त्व की अनुभूति कराता है और साधक को यह बोध देता है कि मैं शरीर, मन, बुद्धि या अहंकार नहीं, बल्कि शुद्ध चैतन्य स्वरूप आत्मा हूँ।
आज के समय में nirvana shatakam lyrics in hindi की खोज इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि लोग सरल भाषा में इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझना चाहते हैं।
यह स्तोत्र छह श्लोकों में आत्मा के शुद्ध स्वरूप का प्रतिपादन करता है, जहाँ “चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्” का निरंतर उद्घोष आत्म-साक्षात्कार का मार्ग प्रशस्त करता है।
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निर्वाण षट्कम् का महत्व (Significance of Nirvana Shatakam)
निर्वाण षट्कम् केवल एक भजन या स्तोत्र नहीं, बल्कि आत्मज्ञान का सशक्त साधन है। इसके पाठ से:
- अहंकार का क्षय होता है
- आत्म-चिंतन की गहराई बढ़ती है
- अद्वैत वेदांत का सार समझ में आता है
- मन, वासनाओं और द्वंद्वों से मुक्ति का मार्ग मिलता है
इसी कारण nirvana shatakam lyrics साधकों, योगियों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।
निर्वाण षट्कम् लिरिक्स इन हिंदी (Nirvana Shatakam Lyrics in Hindi)
श्लोक 1
न मनो बुद्ध्यहंकार चित्तानि नाहं
न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे ।
न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुः
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
अर्थ (संक्षेप में):
मैं मन, बुद्धि, अहंकार या चित्त नहीं हूँ। मैं इंद्रियाँ और पंचमहाभूत भी नहीं हूँ। मैं शुद्ध चैतन्य और आनंद स्वरूप शिव हूँ।
श्लोक 2
न च प्राणसंज्ञो न वै पञ्चवायुः
न वा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोशः ।
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
भावार्थ:
मैं प्राण, पंचवायु, सप्तधातु या पंचकोश नहीं हूँ। मैं शरीर के अंगों से परे शुद्ध आत्मा हूँ।
श्लोक 3
न मे द्वेषरागौ न मे लोभमोहौ
मदो नैव मे नैव मात्सर्यभावः ।
न धर्मो न चार्थो न कामो न मोक्षः
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
भावार्थ:
मुझमें न द्वेष है, न राग, न लोभ, न मोह। मैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से भी परे हूँ।
श्लोक 4
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं
न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञाः ।
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
भावार्थ:
मैं न पुण्य हूँ, न पाप, न सुख, न दुःख। मैं न भोग हूँ, न भोक्ता—मैं शुद्ध आत्मा हूँ।
श्लोक 5
न मे मृत्युशंका न मे जातिभेदः
पिता नैव मे नैव माता न जन्मः ।
न बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्यः
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
भावार्थ:
मुझे न मृत्यु का भय है, न जाति का भेद। न माता-पिता, न गुरु-शिष्य का बंधन—मैं शाश्वत आत्मा हूँ।
श्लोक 6
अहं निर्विकल्पो निराकार रूपो
विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् ।
न चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेयः
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम् ॥
भावार्थ:
मैं निर्विकल्प, निराकार और सर्वव्यापी हूँ। मैं बंधन और मुक्ति से भी परे चैतन्य स्वरूप हूँ।
निर्वाण षट्कम् का दार्शनिक अर्थ (Philosophical Meaning)
nirvana shatakam lyrics in hindi केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मबोध की सीढ़ियाँ हैं। यह स्तोत्र “नेति-नेति” (यह नहीं, वह नहीं) के माध्यम से बताता है कि आत्मा क्या नहीं है, ताकि अंततः हम जान सकें कि आत्मा क्या है।
आदि शंकराचार्य ने इस स्तोत्र में यह स्पष्ट किया कि:
- शरीर नश्वर है
- मन परिवर्तनशील है
- आत्मा शाश्वत, अजर और अमर है
यही कारण है कि nirvana shatakam lyrics ध्यान और आत्मचिंतन के लिए अत्यंत उपयोगी माने जाते हैं।
निर्वाण षट्कम् का पाठ कब और कैसे करें?
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में पाठ करना श्रेष्ठ
- ध्यान या योग अभ्यास के बाद पाठ करें
- शांत स्थान पर एकाग्रता के साथ जप करें
- अर्थ को समझते हुए पाठ करने से लाभ कई गुना बढ़ता है
निर्वाण षट्कम् और आधुनिक जीवन
आज के तनावपूर्ण जीवन में निर्वाण षट्कम् हमें यह स्मरण कराता है कि:
- हम केवल भूमिका (Roles) नहीं हैं
- हम केवल नाम और पहचान नहीं हैं
- हम शुद्ध चेतना हैं
इस दृष्टि से nirvana shatakam lyrics in hindi आत्मिक शांति पाने का सशक्त माध्यम बन जाते हैं।
FAQ – Nirvana Shatakam Lyrics
Q1. निर्वाण षट्कम् किसने लिखा?
आदि शंकराचार्य ने इसकी रचना की।
Q2. निर्वाण षट्कम् का मुख्य संदेश क्या है?
आत्मा शरीर और मन से परे शुद्ध चैतन्य है।
Q3. क्या इसका नियमित पाठ लाभकारी है?
हाँ, यह मानसिक शांति और आत्मबोध में सहायक है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
निर्वाण षट्कम् आत्मज्ञान का अमूल्य रत्न है। इसका प्रत्येक श्लोक हमें सीमित पहचान से ऊपर उठकर शुद्ध चेतना का अनुभव कराता है। यदि आप आत्मिक शांति, ध्यान और अद्वैत वेदांत को समझना चाहते हैं, तो nirvana shatakam lyrics in hindi का नियमित पाठ अवश्य करें।
चिदानन्द रूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्
मैं ही शिव हूँ, मैं ही आनंद स्वरूप हूँ।


