
जय संतोषी माता आरती का आध्यात्मिक महत्व
जय संतोषी माता आरती हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ गाई जाती है। संतोषी माता को संतोष, सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की देवी माना जाता है। विशेष रूप से शुक्रवार के दिन माता संतोषी की पूजा और jai santoshi mata aarti करने से घर में सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि आती है।
भारतीय सनातन परंपरा में माता संतोषी का व्रत और आरती भक्तों के जीवन में संतोष और धैर्य का भाव जाग्रत करती है। “jay jay santoshi mata” का जयघोष करते हुए जब भक्त आरती गाते हैं, तो वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
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Jai Santoshi Mata Aarti Lyrics (जय संतोषी माता आरती बोल)
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन को, सुख संपत्ति दाता॥
जय संतोषी माता…
सुंदर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो।
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो॥
जय संतोषी माता…
गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे।
मंद हँसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे॥
जय संतोषी माता…
स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरावे।
धूप दीप मधुर भोग, भेंट चढ़ावे॥
जय संतोषी माता…
गुड़ चना मेवा, माता भोग लगावे।
शुक्रवार प्रिय मानत, कथा सुनावे॥
जय संतोषी माता…
शुक्रवार व्रत जो कोई, श्रद्धा सहित करे।
दुख दरिद्र सब त्यागे, जीवन सुख भरे॥
जय संतोषी माता…
संतोषी माँ की महिमा, जो नर गावे।
ऋद्धि सिद्धि सुख संपत्ति, भरपूर पावे॥
जय संतोषी माता…
👉 यही है jai santoshi mata aarti lyrics, जिसे भक्त श्रद्धा से गाते हैं।
“Jay Jay Santoshi Mata” का भावार्थ
जब भक्त “jay jay santoshi mata” का उच्चारण करते हैं, तो इसका भाव यह होता है कि हम माता के चरणों में पूर्ण समर्पण कर रहे हैं। यह जयघोष नकारात्मकता को दूर करता है और जीवन में संतुलन लाता है।
संतोषी माता कौन हैं?
संतोषी माता को भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। इन्हें संतोष, धैर्य, संयम और सुख-समृद्धि की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता का व्रत करता है और jai santoshi mata aarti करता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
Jai Santoshi Mata Aarti का धार्मिक महत्व
- जीवन में संतोष और शांति आती है
- आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है
- पारिवारिक कलह दूर होती है
- मनोकामना पूर्ति होती है
- मानसिक तनाव कम होता है
इसी कारण हर शुक्रवार को jai santoshi mata aarti lyrics का पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
संतोषी माता व्रत की पूजा विधि
पूजा सामग्री
- गुड़ और चना
- पीला या लाल वस्त्र
- दीपक और धूप
- फूल
- जल और रोली
पूजा विधि
- शुक्रवार सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- गुड़-चना का भोग लगाएँ
- व्रत कथा सुनें
- अंत में jai santoshi mata aarti गाएँ
संतोषी माता व्रत में क्या न करें?
- खट्टे पदार्थों का सेवन न करें
- खट्टा दान न करें
- व्रत के दौरान क्रोध न करें
यह नियम माता की कृपा प्राप्त करने के लिए आवश्यक माने गए हैं।
Jai Santoshi Mata Aarti से जुड़े चमत्कारी अनुभव
अनेक भक्तों का मानना है कि नियमित रूप से jai santoshi mata aarti lyrics पढ़ने से:
- नौकरी में सफलता मिली
- विवाह संबंधी बाधाएँ दूर हुईं
- संतान सुख प्राप्त हुआ
- कर्ज से मुक्ति मिली
संतोषी माता आरती कब करनी चाहिए?
- शुक्रवार के दिन
- सूर्यास्त के समय
- व्रत पूर्ण होने पर
- किसी भी शुभ कार्य से पहले
Jai Santoshi Mata Aarti Lyrics का SEO महत्व
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निष्कर्ष
जय संतोषी माता आरती केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सुखमय बनाने का आध्यात्मिक माध्यम है। जो भक्त श्रद्धा, विश्वास और नियमों के साथ jai santoshi mata aarti lyrics का पाठ करता है, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं रहता।
“जय जय संतोषी माता” का नाद मन, आत्मा और वातावरण—तीनों को पवित्र कर देता है।
🙏 जय संतोषी माता 🙏


