
Jagannath Rath Yatra Story हिंदू धर्म की सबसे प्राचीन, भव्य और रहस्यमयी धार्मिक यात्राओं में से एक है। ओडिशा के पुरी नगर में आयोजित होने वाली यह यात्रा न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। इसे जगन्नाथ रथ यात्रा इन हिंदी पढ़ने वाले भक्तों के लिए यह कथा आध्यात्मिक ज्ञान, इतिहास और परंपरा का अनमोल संगम है।
जगन्नाथ रथ यात्रा वह दुर्लभ पर्व है, जब स्वयं भगवान मंदिर से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपनी मौसी के घर जाते हैं।
यदि आप ‘ॐ नमः शिवाय मंत्र’ पढ़ना चाहते हैं, तो यहाँ क्लिक करें — ॐ नमः शिवाय मंत्र
भगवान जगन्नाथ कौन हैं?
भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है। “जगन्नाथ” शब्द का अर्थ है – संपूर्ण जगत के नाथ। इनके साथ बलभद्र (बलराम) और सुभद्रा विराजमान रहते हैं।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर में स्थापित ये विग्रह सामान्य मूर्तियों से अलग हैं—
- न हाथ
- न पैर
- बड़ी गोल आंखें
यह स्वरूप स्वयं में एक गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य समेटे हुए है।
Jagannath Rath Yatra Story – पौराणिक कथा
✨ राजा इंद्रद्युम्न की कथा
जगन्नाथ रथ यात्रा की कहानी राजा इंद्रद्युम्न से शुरू होती है। वे भगवान विष्णु के महान भक्त थे। उन्हें नील माधव नामक भगवान की अद्भुत मूर्ति के बारे में ज्ञात हुआ।
कई प्रयासों के बाद जब मूर्ति लुप्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने राजा को स्वप्न में आदेश दिया कि—
“नील समुद्र के तट पर जो लकड़ी मिले, उसी से मेरा विग्रह बनवाओ।”
विश्वकर्मा जी एक वृद्ध कारीगर के रूप में आए और शर्त रखी कि उन्हें अकेले में मूर्ति बनानी होगी। शर्त टूटते ही वे अदृश्य हो गए और अधूरी मूर्तियाँ ही स्थापित कर दी गईं। यही अधूरी मूर्तियाँ आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रूप में पूजी जाती हैं।
रथ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?
मान्यता है कि गुंडिचा माता भगवान जगन्नाथ की मौसी हैं। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान अपनी मौसी के घर जाने के लिए निकलते हैं।
इसी यात्रा को जगन्नाथ रथ यात्रा कहा जाता है।
रथों का विशेष महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा में तीन विशाल रथ बनाए जाते हैं:
1. नंदीघोष रथ (भगवान जगन्नाथ)
- ऊँचाई: लगभग 45 फीट
- 16 पहिए
2. तालध्वज रथ (बलभद्र)
- 14 पहिए
3. दर्पदलन रथ (सुभद्रा)
- 12 पहिए
इन रथों का निर्माण हर साल नई लकड़ी से किया जाता है।
रथ खींचने का महत्व
Jagannath Rath Yatra Story in Hindi में रथ खींचने को मोक्ष का साधन माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति भगवान का रथ खींचता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
यहां तक कहा जाता है—
“रथ यात्रा के दर्शन मात्र से सौ जन्मों के पाप कट जाते हैं।”
गुंडिचा मंदिर का महत्व
भगवान 7 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विश्राम करते हैं। इसे भगवान का ग्रीष्मकालीन निवास माना जाता है। इसके बाद बहुड़ा यात्रा होती है, जिसमें भगवान पुनः मुख्य मंदिर लौटते हैं।
बहुड़ा यात्रा की कथा
वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहते हैं। इस दौरान भगवान लक्ष्मी जी को मनाने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं क्योंकि भगवान बिना बताए मौसी के घर चले जाते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा का वैश्विक महत्व
आज जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
- लंदन
- न्यूयॉर्क
- मॉस्को
- सिडनी
जैसे शहरों में भी रथ यात्रा निकाली जाती है।
Jagannath Yatra in 2026
Jagannath Yatra in 2026 श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। वर्ष 2026 में भी यह यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को बड़े धूमधाम से मनाई जाएगी।
👉 2026 में:
- लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचेंगे
- सुरक्षा और व्यवस्थाएं और भी व्यापक होंगी
- डिजिटल दर्शन की सुविधा भी बढ़ेगी
आध्यात्मिक अर्थ
Jagannath Rath Yatra Story केवल यात्रा नहीं बल्कि जीवन दर्शन है।
- रथ = मानव शरीर
- रस्सी = भक्ति
- सारथी = आत्मा
- भगवान = परम सत्य
जब भक्त रथ खींचता है, तो वह अपने जीवन को ईश्वर की ओर खींचता है।
यदि आप रोज़ाना भक्तिमय वीडियो से जुड़े पाठ सुनना चाहते हैं, तो हमारे YouTube चैनल पर जाएँ— Bhakti Uday Bharat
रथ यात्रा से जुड़ी मान्यताएं
- जो इस दिन उपवास करता है, उसे अक्षय पुण्य मिलता है
- रथ यात्रा देखने से पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है
- यह यात्रा जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर है
Jagannath Rath Yatra in Hindi – निष्कर्ष
जगन्नाथ रथ यात्रा की कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि भक्तों के बीच विचरण करते हैं। यह पर्व समता, भक्ति और मानवता का संदेश देता है।
Jagannath Rath Yatra Story, Jagannath Yatra in 2026 और Jagannath Rath Yatra in Hindi—तीनों ही शब्द इस महान परंपरा की गहराई को दर्शाते हैं।


