Dhanu Sankranti 2025: धनु संक्रांति 2025

Dhanu Sankranti 2025

Dhanu Sankranti 2025: महत्व, तिथि, पूजन-विधि, व्रत-फल और धार्मिक मान्यताएँ

Dhanu Sankranti 2025 हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के धनु राशि में प्रवेश का अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। वैदिक ज्योतिष कहता है कि इस परिवर्तन से दिव्य ऊर्जा सक्रिय होती है, जिससे साधना, ध्यान और पूजा-पाठ का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार Dhanu Sankranti हर वर्ष पुण्य कमाने का अवसर देती है, क्योंकि इस दिन सूर्य नई राशि में प्रवेश करके समस्त जीवों को तेज, उत्साह और नई ऊर्जा प्रदान करता है।

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Dhanu Sankranti 2025 की तिथि और समय

Dhanu Sankranti 2025 की तिथि: 16 दिसंबर 2025 (मंगलवार)

पंचांग के अनुसार सूर्य का धनु राशि में प्रवेश इसी दिन होगा।
संक्रमण का काल अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है।
इस अवधि में किए गए दान, जप, तप और स्नान का पुण्य कई गुना अधिक मिलता है।
यह दिन धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक उन्नति और देव-पूजन के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है।

Dhanu Sankranti का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथ बताते हैं कि सूर्य जब धनु राशि में प्रवेश करता है, तब ब्रह्मांडीय ऊर्जा पृथ्वी पर विशेष प्रभाव डालती है। स्कंद पुराण तथा पद्म पुराण दोनों में इसका महत्व वर्णित है। कहा जाता है कि इस काल में देवताओं की उपासना शीघ्र फल देती है।
भक्त सूर्योदय के समय स्नान, ध्यान और दान के माध्यम से आध्यात्मिक पवित्रता प्राप्त करते हैं। इस दिन किए गए सत्कर्मों से मन, बुद्धि और विचारों में स्पष्टता आती है।

Dhanu Sankranti से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

पौराणिक कथा के अनुसार इस अवधि में देवताओं ने कठोर तप किया था, जिसके कारण सूर्य का धनु राशि में प्रवास आध्यात्मिक जागृति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
कई लोककथाएँ यह भी बताती हैं कि इस दिन किए गए धर्म-कर्म का फल दोगुना होकर मिलता है।
कृषि संस्कृति की दृष्टि से यह समय भूमि की ऊर्जा को बढ़ाने वाला माना गया है, इसलिए किसानों के लिए यह तिथि नए कृषि-सत्र की शुरुआत का संकेत देती है।

Dhanu Sankranti की पूजा-विधि

इस शुभ अवसर पर किए जाने वाले कर्मकांड अत्यंत सरल होते हैं, फिर भी इनका आध्यात्मिक प्रभाव गहरा होता है। नीचे परंपरागत विधि प्रस्तुत है—

1. प्रातः स्नान

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से तन-मन शुद्ध होता है।
नदी या तीर्थ में स्नान करने का फल सर्वोच्च माना जाता है।
यदि संभव न हो, तो गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने से भी शुभ लाभ प्राप्त होता है।

2. सूर्य देव को अर्घ्य

स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करना अनिवार्य माना जाता है।
तांबे के पात्र में जल, गुड़, चावल और लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें।
ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप शुभ फल प्रदान करता है।

3. भगवान विष्णु की आराधना

धनु मास में भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी होती है।
खिचड़ी, तिल, गुड़ और गन्ने का भोग लगाने की परंपरा भारत के कई क्षेत्रों में प्रचलित है।

4. व्रत पालन

शास्त्र कहते हैं कि Dhanu Sankranti पर व्रत रखने से सौभाग्य और समृद्धि की वृद्धि होती है।
व्रतधारी भक्त दिनभर सात्त्विक आहार लेकर ध्यान, जप और पूजा में समय बिताते हैं।

5. दान धर्म

इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
तिल, गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र, अनाज, फल, भोजन आदि का दान महान पुण्य देता है।

Dhanu Sankranti पर किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्य

  • तीर्थ या नदी में स्नान
  • सूर्य को अर्घ्य
  • दान-पुण्य
  • ध्यान और मंत्र-जप
  • गरीबों की सहायता
  • दीपदान
  • मंदिरों में दर्शन और पूजा

कई लोग इस तिथि पर कोई नया कार्य आरंभ करते हैं ताकि सूर्य की ऊर्जा उस कार्य में सफलता प्रदान करे।

ज्योतिषीय दृष्टि से Dhanu Sankranti का महत्व

धनु अग्नि तत्व की राशि है और सूर्य अग्नि तत्व का स्वामी है।
इस कारण सूर्य का धनु में आगमन अत्यंत प्रबल ऊर्जा उत्पन्न करता है।
ये परिवर्तन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को इस प्रकार प्रभावित करते हैं—

  • आत्मविश्वास में वृद्धि
  • स्वास्थ्य में सुधार
  • कार्यक्षेत्र में प्रगति
  • शिक्षा क्षेत्र में बेहतर परिणाम
  • आर्थिक स्थिरता
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश

जिन व्यक्तियों पर शनि, राहु या केतु की अशुभ छाया हो, वे इस दिन सूर्य उपासना करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

भारत के अलग-अलग राज्यों में उत्सव

  • ओडिशा: ढेनु संक्रांति के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
  • उत्तर भारत: दान, स्नान और सूर्य उपासना की परंपरा प्रमुख।
  • दक्षिण भारत: सूर्य की उन्नति का विशेष पर्व माना जाता है।
  • पूर्वी भारत: मंदिरों में विशेष भोग और आरती का आयोजन होता है।

Dhanu Sankranti 2025 के लिए विशेष सुझाव

  1. प्रातः काल शांत वातावरण में सूर्य मंत्र का जाप करें।
  2. अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
  3. किसी नए संकल्प के साथ आध्यात्मिक या व्यावहारिक कार्यों की शुरुआत करें।
  4. भगवान विष्णु की आराधना करके दिन का शुभारंभ करें।
  5. नकारात्मक विचारों का त्याग कर सकारात्मकता अपनाएँ।

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निष्कर्ष

Dhanu Sankranti 2025, अर्थात् 16 दिसंबर 2025, धर्म, आध्यात्मिकता, ऊर्जा और दान का अत्यंत शुभ पर्व है।
यह दिन सूर्य की प्रकाशमय ऊर्जा को स्वीकार कर जीवन में सकारात्मकता स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है।
जो व्यक्ति इस तिथि पर पूजा, ध्यान, व्रत और दान करता है, वह अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सौभाग्य का अनुभव करता है।
यह पवित्र अवसर हमें सिखाता है कि अच्छे विचार, अच्छे कर्म और दिव्य श्रद्धा ही मनुष्य को प्रगति और संतुलन की राह पर ले जाते हैं।

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