Aarti Shree Ramayan Ji Ki Lyrics : आरती श्री रामायण जी की

प्रस्तावना

aarti shree ramayan ji ki हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक आरती मानी जाती है। रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि मर्यादा, धर्म, सत्य, त्याग और आदर्श जीवन मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। जब रामायण जी की आरती गाई जाती है, तब ऐसा माना जाता है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक बल का संचार होता है।

रामचरितमानस के पाठ के बाद आरती श्री रामायण जी की का गायन परंपरागत रूप से किया जाता है। यह आरती भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने का माध्यम है।

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आरती श्री रामायण जी की का धार्मिक महत्व

रामायण जी की आरती का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह सीधे-सीधे तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि जिस घर में नियमित रूप से रामायण पाठ और आरती होती है, वहां कभी नकारात्मकता नहीं टिकती।

रामायण हमें सिखाती है:

  • सत्य के मार्ग पर चलना
  • माता-पिता की आज्ञा का पालन
  • पति-पत्नी के आदर्श संबंध
  • भाईचारे और मित्रता का महत्व
  • अधर्म पर धर्म की विजय

इन्हीं भावों को आरती के माध्यम से संक्षेप में व्यक्त किया जाता है।

आरती श्री रामायण जी की का स्रोत

aarti shree ramayan ji ki का मूल स्रोत रामचरितमानस है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में की थी। हालांकि आरती स्वयं रामचरितमानस का मूल छंद नहीं है, लेकिन यह तुलसी परंपरा और राम भक्ति से उत्पन्न एक लोकप्रचलित आरती है, जिसे मानस पाठ के समापन पर गाया जाता है।

यह आरती उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अत्यंत लोकप्रिय है।

आरती श्री रामायण जी की लिरिक्स (Aarti Shree Ramayan Ji Ki Lyrics in Hindi)

॥आरती॥

आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥

गावत ब्रहमादिक मुनि नारद ।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद ।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥

गावत बेद पुरान अष्टदस ।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतान को सरबस ।
सार अंश सम्मत सब ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥

गावत संतत शंभु भवानी ।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी ।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥

कलिमल हरनि बिषय रस फीकी ।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥
दलनि रोग भव मूरि अमी की ।
तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥

आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥

आरती श्री रामायण जी की गाने का सही समय

  • रामायण पाठ के बाद
  • पूर्णिमा और अमावस्या के दिन
  • राम नवमी
  • दीपावली
  • शनिवार या मंगलवार

विशेष रूप से संध्या समय इस आरती को करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है।

आरती श्री रामायण जी की करने की विधि

  1. रामायण ग्रंथ को साफ चौकी पर स्थापित करें।
  2. दीपक, अगरबत्ती और फूल अर्पित करें।
  3. श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का ध्यान करें।
  4. पूरे मन और श्रद्धा से आरती गाएं।
  5. अंत में प्रसाद वितरित करें।

आरती श्री रामायण जी की से होने वाले लाभ

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति
  • पारिवारिक कलह में कमी
  • आध्यात्मिक उन्नति
  • बच्चों में संस्कारों का विकास

नियमित रूप से aarti shree ramayan ji ki करने से व्यक्ति के जीवन में धैर्य और संयम आता है।

रामायण और आरती का आध्यात्मिक संबंध

रामायण जीवन का दर्पण है और आरती उस दर्पण को नमन करने का भाव। जब भक्त आरती करता है, तो वह केवल दीपक नहीं घुमाता, बल्कि अपने अहंकार, क्रोध और नकारात्मक भावों को भी प्रभु चरणों में अर्पित करता है।

बच्चों और युवाओं के लिए महत्व

आज की पीढ़ी के लिए रामायण और इसकी आरती नैतिक शिक्षा का सबसे सरल माध्यम है। इससे संस्कार, अनुशासन और कर्तव्यबोध विकसित होता है।

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निष्कर्ष

aarti shree ramayan ji ki केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का साधन है। जो भी श्रद्धा और विश्वास से aarti shree ramayan ji ki lyrics का पाठ करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है।

यदि आप नियमित रूप से रामायण पाठ और उसकी आरती करते हैं, तो यह निश्चय ही आपके जीवन को धर्म, शांति और आनंद से भर देगा।

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