
श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद मंत्र
(Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nityananda Mantra)
वैष्णव परंपरा में श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानंद प्रभु का नाम अत्यंत पावन और कल्याणकारी माना जाता है। “जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद” मंत्र भक्ति आंदोलन का मूल मंत्र है, जिसे जपने मात्र से मन शुद्ध होता है और हृदय में श्री हरि की भक्ति जागृत होती है।
यह मंत्र विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय में अत्यंत श्रद्धा से बोला जाता है और इसे महामंत्र हरे कृष्ण से पहले उच्चारित किया जाता है।
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जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद मंत्र (मूल मंत्र)
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद
श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृंद
यही मंत्र “jai shri krishna chaitanya prabhu nityananda mantra” के नाम से प्रसिद्ध है।
श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद लिरिक्स
(Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nityananda Lyrics)
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानंद
श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृंद
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
यह मंत्र महामंत्र के साथ जपने से विशेष फलदायी माना जाता है।
श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु कौन थे?
श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है, जिन्होंने कलियुग में नाम-स्मरण और संकीर्तन का प्रचार किया। उनका जन्म 1486 ई. में नवद्वीप (पश्चिम बंगाल) में हुआ था।
उन्होंने यह संदेश दिया कि:
- ईश्वर प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग हरिनाम संकीर्तन है
- जाति, धर्म, वर्ग से ऊपर उठकर हर व्यक्ति भक्ति कर सकता है
श्री नित्यानंद प्रभु का महत्व
श्री नित्यानंद प्रभु को बलराम जी का अवतार माना जाता है। वे चैतन्य महाप्रभु के सबसे प्रिय और प्रमुख सहयोगी थे।
नित्यानंद प्रभु का स्वभाव:
- अत्यंत करुणामय
- पापियों पर भी कृपा करने वाले
- बिना किसी भेदभाव के हरिनाम बांटने वाले
कहा जाता है कि नित्यानंद प्रभु की कृपा के बिना चैतन्य महाप्रभु की भक्ति संभव नहीं।
इस मंत्र का आध्यात्मिक अर्थ
जय – विजय और महिमा
श्री कृष्ण चैतन्य – स्वयं श्रीकृष्ण का गौर रूप
प्रभु नित्यानंद – बलराम स्वरूप करुणा के सागर
अद्वैत, गदाधर, श्रीवास – पंचतत्व के अन्य सदस्य
यह मंत्र पंचतत्व को नमन करता है, जिससे नाम जप में आने वाले सभी विघ्न दूर होते हैं।
Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nityananda Mantra के लाभ
इस मंत्र के नियमित जप से:
✔️ मन की अशांति दूर होती है
✔️ भक्ति भाव बढ़ता है
✔️ नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है
✔️ पाप कर्मों का क्षय होता है
✔️ जीवन में सकारात्मकता आती है
✔️ श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है
विशेष रूप से कलियुग में यह मंत्र मोक्ष का द्वार माना गया है।
मंत्र जप की सही विधि
यदि आप shri krishna chaitanya prabhu nityananda mantra का जप करना चाहते हैं, तो:
- प्रातःकाल स्नान के बाद जप करें
- तुलसी माला का प्रयोग करें
- कम से कम 108 बार जप करें
- मंत्र जप से पहले पंचतत्व मंत्र बोलें
- शांत और पवित्र स्थान चुनें
पंचतत्व मंत्र का महत्व
हरे कृष्ण महामंत्र से पहले यह मंत्र इसलिए बोला जाता है ताकि:
- नाम जप में अपराध न हों
- मन पूरी तरह शुद्ध हो
- भगवान की कृपा शीघ्र मिले
इसीलिए ISKCON और वैष्णव मंदिरों में सबसे पहले यही मंत्र गाया जाता है।
शास्त्रों में उल्लेख
चैतन्य चरितामृत और चैतन्य भागवत में इस मंत्र का वर्णन मिलता है। श्रील प्रभुपाद ने भी इस मंत्र को भक्ति योग की आधारशिला बताया है।
क्यों जपें “Jai Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nityananda Mantra”?
आज के तनावपूर्ण जीवन में:
- मन भटकता है
- शांति की कमी है
- आध्यात्मिक खालीपन महसूस होता है
यह मंत्र आंतरिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव प्रदान करता है।
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निष्कर्ष
Shri Krishna Chaitanya Prabhu Nityananda Mantra केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि करुणा, भक्ति और प्रेम का महासागर है। इसका नियमित जप जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करता है और श्री हरि की कृपा का मार्ग खोलता है।
यदि आप सच्चे मन से “jai shri krishna chaitanya prabhu nityananda mantra” का स्मरण करते हैं, तो निश्चय ही आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।


