
Shiv Ji Ki Aarti Lyrics – भगवान शिव जी की आरती हिंदी बोल, महत्व और विधि
भूमिका: क्यों आवश्यक है शिव जी की आरती?
हिंदू धर्म में भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ, आदि देव और त्रिलोचन कहा जाता है। वे सृष्टि के पालन, संहार और पुनर्निर्माण—तीनों के प्रतीक हैं। shiv ji ki aarti केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा को शिव-तत्व से जोड़ने का माध्यम है।
जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से Shiv Ji Ki Aarti Lyrics का पाठ करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। विशेषकर सावन मास, महाशिवरात्रि और सोमवार को bhagwan shiv ji ki aarti करने का अत्यंत पुण्य फल मिलता है।
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भगवान शिव: करुणा, वैराग्य और शक्ति का स्वरूप
भगवान शिव को सरलता से प्रसन्न होने वाला देव कहा जाता है। वे न तो दिखावे की पूजा चाहते हैं और न ही आडंबर की। एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चा मन—यही उनकी सबसे बड़ी पूजा है।
shiv ji ki aarti hindi lyrics में शिव के इसी स्वरूप का वर्णन मिलता है—जहाँ वे योगी भी हैं, गृहस्थ भी, संहारक भी हैं और करुणामय पिता भी।
Shiv Ji Ki Aarti Lyrics | शिव जी की आरती हिंदी लिरिक्स
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमालाधारी।
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुण स्वामी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥
bhagwan shiv ji ki aarti का आध्यात्मिक अर्थ
शिव आरती की प्रत्येक पंक्ति गहरे आध्यात्मिक अर्थ को दर्शाती है।
यह आरती बताती है कि शिव ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों के मूल हैं। वे निर्गुण भी हैं और सगुण भी।
shiv ji ki aarti के माध्यम से भक्त अपने अहंकार, क्रोध और मोह को त्याग कर शिव-चेतना में लीन होता है।
शिव जी की आरती करने का सही समय
shiv ji ki aarti hindi lyrics का पाठ निम्न अवसरों पर विशेष फलदायी माना जाता है:
- सोमवार – शिव का प्रिय दिन
- महाशिवरात्रि – मोक्ष प्रदान करने वाली रात्रि
- सावन मास – शिव भक्ति का श्रेष्ठ समय
- प्रातः काल – मानसिक शांति हेतु
- संध्या आरती – नकारात्मक ऊर्जा नाश हेतु
शिव आरती की विधि (Step-by-Step)
अगर आप Shiv Ji Ki Aarti Lyrics का पूर्ण फल चाहते हैं, तो निम्न विधि अपनाएँ:
- स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- शिवलिंग या शिव प्रतिमा स्थापित करें
- जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करें
- दीपक और धूप जलाएँ
- शांत मन से shiv ji ki aarti का पाठ करें
- अंत में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें
शिव जी के प्रतीक और उनका अर्थ
bhagwan shiv ji ki aarti में वर्णित प्रतीक जीवन दर्शन सिखाते हैं:
- त्रिशूल – तीन गुणों पर नियंत्रण
- डमरू – सृष्टि की ध्वनि
- भस्म – नश्वरता का बोध
- चंद्रमा – मन का संतुलन
- गंगा – पवित्रता और करुणा
शिव आरती करने के लाभ
नियमित रूप से shiv ji ki aarti hindi lyrics का पाठ करने से:
- मन शांत और स्थिर होता है
- तनाव और भय से मुक्ति मिलती है
- नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं
- जीवन में संतुलन आता है
- आध्यात्मिक उन्नति होती है
शिव आरती और शिव मंत्र का संबंध
आरती के बाद “ॐ नमः शिवाय” का जाप करने से उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
Shiv Ji Ki Aarti Lyrics और मंत्र—दोनों मिलकर भक्त को शिव के समीप ले जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या शिव आरती रोज करनी चाहिए?
हाँ, प्रतिदिन shiv ji ki aarti करने से मानसिक शांति मिलती है।
Q2. क्या बिना व्रत के शिव आरती की जा सकती है?
बिल्कुल, भक्ति ही सबसे बड़ा व्रत है।
Q3. शिव आरती घर में कब करें?
सुबह स्नान के बाद या शाम की संध्या में।
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निष्कर्ष: शिव आरती—जीवन को शिवमय बनाने का मार्ग
Shiv Ji Ki Aarti Lyrics केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है।
जो भक्त सच्चे मन से bhagwan shiv ji ki aarti करता है, उसके जीवन में शिव स्वयं मार्गदर्शक बन जाते हैं।
ॐ नमः शिवाय। हर हर महादेव।
