
माँ विंध्येश्वरी देवी शक्ति, करुणा और आशीर्वाद की सजीव प्रतिमूर्ति हैं। उत्तर भारत में विशेष रूप से विंध्याचल धाम से जुड़ी यह देवी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी जाती हैं। Vindheshwari Stotra का नियमित पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मन को अद्भुत शांति मिलती है।
जो श्रद्धालु vindheshwari stotra lyrics in hindi खोजते हैं, उनके लिए यह स्तोत्र माँ से सीधे जुड़ने का एक सरल माध्यम है। इस पावन स्तोत्र में देवी के स्वरूप, उनकी महिमा और कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। सुबह या शाम शांत मन से vindheshwari stotra lyrics का पाठ करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् (Vindhyeshwari Stotram)
निशुम्भ शुम्भ गर्जनी,
प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी ।
बनेरणे प्रकाशिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
त्रिशूल मुण्ड धारिणी,
धरा विघात हारिणी ।
गृहे-गृहे निवासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
दरिद्र दुःख हारिणी,
सदा विभूति कारिणी ।
वियोग शोक हारिणी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
लसत्सुलोल लोचनं,
लतासनं वरप्रदं ।
कपाल-शूल धारिणी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
कराब्जदानदाधरां,
शिवाशिवां प्रदायिनी ।
वरा–वराननां शुभां,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
कपीन्द्न जामिनीप्रदां,
त्रिधा स्वरूप धारिणी ।
जले-थले निवासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
विशिष्ट शिष्ट कारिणी,
विशाल रूप धारिणी ।
महोदरे विलासिनी,
भजामि विन्ध्यवासिनी ॥
पुंरदरादि सेवितां,
पुरादिवंशखण्डितम् ।
विशुद्ध बुद्धिकारिणीं,
भजामि विन्ध्यवासिनीं ॥
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निष्कर्ष
Vindheshwari Stotra Lyrics in Hindi को आप रोज पढ़ सकते हैं या नवरात्रि, अष्टमी और विशेष पूजा के समय अवश्य शामिल करें। यह केवल एक पाठ नहीं, बल्कि माँ के चरणों में समर्पण की भावना है।


