
शनि देव जी का परिचय
शनि देव जी हिंदू धर्म में न्याय के देवता माने जाते हैं। वे कर्मों के अनुसार फल देने वाले देव हैं। व्यक्ति के अच्छे या बुरे कर्मों के आधार पर शनि देव जी उसे फल प्रदान करते हैं। शनि देव जी सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं तथा नवग्रहों में सबसे प्रभावशाली ग्रह माने जाते हैं।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ होती है, तब शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इन दोषों से मुक्ति पाने के लिए Shani Dev Ji Ki Aarti , पूजा और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।
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शनि देव जी की आरती का महत्व
Shani Dev Ji Ki Aarti lyrics in Hindi का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक शनि देव जी की आरती करता है, उस पर शनि देव की विशेष कृपा बनी रहती है।
शनि आरती करने के लाभ:
- शनि दोष से मुक्ति
- साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है
- मानसिक तनाव और भय से राहत
- आर्थिक समस्याओं में कमी
- कर्मों में सुधार और जीवन में स्थिरता
शनि देव जी की आरती करने का सही समय
- शनिवार का दिन शनि देव जी को समर्पित होता है
- सूर्यास्त के बाद आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है
- सरसों के तेल का दीपक जलाना लाभकारी होता है
- नीले या काले वस्त्र धारण करना श्रेष्ठ माना जाता है
Shani Dev Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi
शनि देव जी की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी॥
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी।
कृपा बरसाओ शनि देव दुखहारी॥
कर्मों के फल दाता प्रभु न्यायकारी।
भक्तन की विपदा हरहु भवभय हारी॥
पिंगल नेत्र विशाल नख धार भारी।
अपरम्पार शक्ति प्रभु सब दुख टारी॥
शनि देव की जो कोई सच्चे मन से आरती गावे।
उसके सब दुख नष्ट हों, जीवन सुख पावे॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
शनि देव जी की आरती कैसे करें
Shani Dev Ji Ki Aarti lyrics पढ़ते समय मन को शांत रखें और किसी प्रकार का नकारात्मक विचार न रखें।
आरती विधि:
- शनि देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- सरसों के तेल का दीपक जलाएं
- काले तिल, उड़द या नीले फूल अर्पित करें
- पहले शनि मंत्र का जाप करें
- फिर शनि देव जी की आरती करें
- अंत में क्षमा प्रार्थना करें
शनि देव जी का प्रिय मंत्र
आरती के साथ यदि मंत्र जाप किया जाए तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
मंत्र:
ॐ शं शनैश्चराय नमः
शनिवार के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप विशेष फल देता है।
शनि दोष और शनि देव जी की आरती
जब कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में होता है, तब व्यक्ति को बार-बार संघर्ष, देरी और असफलताओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में shani dev ji ki aarti lyrics in hindi का नियमित पाठ व्यक्ति को मानसिक शक्ति और धैर्य प्रदान करता है।
शनि देव केवल दंड देने वाले देव नहीं हैं, बल्कि वे व्यक्ति को सही मार्ग पर लाने वाले देव हैं। जो भक्त सच्चे मन से शनि देव जी की आरती करता है, उसके जीवन में स्थिरता और अनुशासन आता है।
शनि देव जी से जुड़ी मान्यताएं
- शनि देव जी गरीब, मजदूर और असहाय लोगों के रक्षक हैं
- शनि देव को काले तिल और तेल अर्पित करना शुभ होता है
- शनिदेव को प्रसन्न करने से भाग्य मजबूत होता है
- अहंकार और अन्याय करने वालों पर शनि देव शीघ्र क्रोधित होते हैं
शनि देव जी की आरती का आध्यात्मिक प्रभाव
Shani Dev Ji Ki Aarti lyrics in Hindi केवल एक भजन नहीं बल्कि आत्मशुद्धि का माध्यम है। यह व्यक्ति को अपने कर्मों पर विचार करने और जीवन में अनुशासन लाने की प्रेरणा देती है।
जो व्यक्ति नियमित रूप से शनि आरती करता है, वह धीरे-धीरे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. क्या रोज शनि देव जी की आरती कर सकते हैं?
हाँ, रोज की जा सकती है, लेकिन शनिवार को विशेष फल मिलता है।
Q2. शनि देव जी की आरती किस समय करें?
सूर्यास्त के बाद करना सर्वोत्तम माना जाता है।
Q3. क्या केवल आरती से शनि दोष शांत होता है?
आरती के साथ मंत्र जाप और अच्छे कर्म करने से प्रभाव अधिक होता है।
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निष्कर्ष
Shani Dev Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi न केवल शनि दोष से मुक्ति का साधन है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन, धैर्य और कर्म सुधार का मार्ग भी दिखाती है। शनि देव जी न्यायप्रिय हैं और सच्चे भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं।
यदि आप श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ शनि देव जी की आरती करते हैं, तो निश्चित ही आपके जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगेंगी।
